जयदेव बाबा का निस्वार्थ सेवा भाव बस्तर दशहरा की परंपराओं को दे रहा नई ऊर्जा : बलराम मांझी

रथ निर्माण के कारीगरों, मांझी-चालकी, सिरहा-गुनिया और पुजारियों के लिए भोजन, जलपान एवं ठहरने की व्यवस्था सराहनीय


75 दिनों तक चलने वाले विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा में सेवा और समर्पण की अनूठी मिसाल पेश कर रहे कुमार जयदेव, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का मुरिया दरबार में आगमन पूरे बस्तर के लिए गौरव का विषय

जगदलपुर। विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा, सामाजिक समरसता और जनभागीदारी का अद्भुत संगम है। लगभग 75 दिनों तक चलने वाले इस ऐतिहासिक पर्व में जहां विभिन्न धार्मिक रस्मों और परंपराओं का निर्वहन किया जाता है, वहीं इससे जुड़े सेवाभावी लोगों का योगदान भी विशेष महत्व रखता है। इसी कड़ी में कुमार जयदेव द्वारा दशहरा पर्व के दौरान सेवादारों, रथ निर्माण में जुटे कारीगरों, मांझी-चालकी, सिरहा-गुनिया और पुजारियों के लिए भोजन, जलपान एवं ठहरने की व्यवस्था कराई जा रही है। उनके इस निस्वार्थ सेवा भाव की बस्तर दशहरा समिति के उपाध्यक्ष बलराम मांझी ने सराहना करते हुए उन्हें साधुवाद दिया है।

बलराम मांझी ने कहा कि जयदेव बाबा द्वारा दशहरा पर्व के दौरान जिस समर्पण और सेवाभाव के साथ लोगों की सेवा की जा रही है, वह अपने आप में प्रशंसनीय है। दशहरा की विभिन्न रस्मों को संपन्न कराने के लिए दूर-दूर से सेवादार, रथ निर्माण के कारीगर, मांझी-चालकी, सिरहा-गुनिया और पुजारी गण पहुंचते हैं। पर्व की तैयारियों से लेकर अंतिम विदाई तक इन सभी की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। ऐसे में उनके भोजन, जलपान और ठहरने की व्यवस्था के लिए आगे आना वास्तव में अनुकरणीय कार्य है।

उन्होंने बताया कि दशहरा पर्व के दौरान असंख्य देवी-देवताओं के साथ उनके सेवादार भी पहुंचते हैं। शासन की ओर से उनके लिए राशन और ठहरने की व्यवस्था की जाती है, लेकिन किन्हीं कारणों से जिन लोगों तक ये सुविधाएं नहीं पहुंच पातीं, उनकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कुमार बाबा अपनी ओर से व्यवस्था कर रहे हैं। यह उनकी संवेदनशीलता और सेवा के प्रति समर्पण को दर्शाता है।

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बलराम मांझी ने कहा कि धन-संपत्ति तो बहुत लोगों के पास होती है, लेकिन उसे दूसरों की सेवा में लगाने की इच्छा और निस्वार्थ भाव हर किसी में नहीं होता। यह विशेषता जयदेव बाबा में देखने को मिलती है। वे केवल दशहरा ही नहीं, बल्कि अन्य धार्मिक आयोजनों और पूजा-पाठ के कार्यों में भी समाज के लोगों के साथ खड़े रहते हैं और हर संभव सहयोग प्रदान करते हैं।

उन्होंने बताया कि बाबा द्वारा आज भी हम लोगों का सम्मान किया गया, जिसके लिए वे उनके आभारी हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा हम सभी का सामूहिक पर्व है। इसमें प्रत्येक समाज, परंपरा और उससे जुड़े लोगों की अपनी विशिष्ट भूमिका है। कुमार जयदेव का सेवा कार्य सभी के लिए प्रेरणादायक है।

बलराम मांझी ने कुमार जयदेव के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दशहरा पर्व की शुरुआत से लेकर अंतिम विदाई तक उनके द्वारा जिस तरह सेवा की जा रही है, उसके लिए वे उन्हें हृदय से साधुवाद देते हैं।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का मुरिया दरबार में आगमन बस्तर के लिए गौरव का विषय

बस्तर दशहरा की ऐतिहासिक परंपराओं और आगामी मुरिया दरबार को लेकर बलराम मांझी ने कहा कि यह पर्व अपनी विशिष्ट रस्मों, रीति-रिवाजों और सामाजिक सहभागिता के लिए विश्वभर में अलग पहचान रखता है। लगभग 75 दिनों तक चलने वाले इस पर्व की प्रत्येक रस्म अपने आप में अनूठी है और बस्तर के समृद्ध इतिहास एवं सांस्कृतिक विरासत को प्रतिबिंबित करती है। दशहरा से जुड़ा प्रत्येक समाज अपनी परंपराओं का निर्वहन पूरी श्रद्धा और जिम्मेदारी के साथ करता है। इन्हीं सामूहिक प्रयासों से यह ऐतिहासिक पर्व संपन्न होता है।

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उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का मुरिया दरबार में आगमन पूरे बस्तर के लिए अत्यंत गर्व का विषय है। यह अवसर बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय परंपराओं और ऐतिहासिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर होगा। मुरिया दरबार का अपना विशिष्ट इतिहास और परंपरा है। इस ऐतिहासिक आयोजन में राष्ट्रपति की उपस्थिति बस्तरवासियों के लिए गौरवपूर्ण क्षण है। राष्ट्रपति के आगमन से बस्तर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपराओं को व्यापक पहचान मिलेगी।

इस अवसर पर बलराम मांझी के साथ अन्य दो परगनाओं के मांझी भी उपस्थित रहे। उन्होंने कुमार जयदेव के सेवा कार्यों की सराहना करते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे सेवाभावी प्रयास बस्तर दशहरा की परंपराओं को और अधिक सशक्त बनाने के साथ समाज में सहयोग, समर्पण और सद्भाव की भावना को मजबूत करते हैं।

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