आपदा की घड़ी में सेवा की मिसाल, कुरुषपाल और आसपास के गांवों में कराया दोपहर-रात का भोजन

जगदलपुर। बाढ़ और भारी बारिश से प्रभावित परिवारों के लिए मुश्किल की इस घड़ी में मानवता और सेवा भावना का सिलसिला लगातार जारी है। संकट के समय जरूरतमंदों के साथ खड़े होकर उनकी मूलभूत जरूरतों को पूरा करने की पहल समाज में संवेदना और सहयोग की मिसाल पेश कर रही है।

इसी सेवा भाव के साथ आज कुरुषपाल एवं आसपास के गांवों में बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए दोपहर और रात के भोजन की व्यवस्था की गई। इस सेवा कार्य में कमल झझ, पूर्व सिख समाज अध्यक्ष सरदार अमरीक सिंह जी, पूर्व बस्तर परिवहन संघ अध्यक्ष अमर रियर एवं जंग बहादुर सिंह सोढ़ी जी ने सहयोग करते हुए प्रभावित लोगों तक भोजन पहुंचाने की व्यवस्था की।

भूख से बड़ी कोई मजबूरी नहीं, सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं

बाढ़ की वजह से प्रभावित परिवारों के सामने जहां रोजमर्रा की जिंदगी कठिन हो गई है, वहीं ऐसे समय में उनके लिए भोजन की व्यवस्था करना केवल राहत पहुंचाना नहीं, बल्कि मुश्किल वक्त में इंसान के साथ इंसान के खड़े होने का संदेश है।

दोपहर से लेकर रात तक प्रभावित परिवारों के लिए भोजन की व्यवस्था कर निस्वार्थ सेवा और मानवीय संवेदना का परिचय दिया गया। आपदा की इस घड़ी में जरूरतमंदों के बीच पहुंचकर भोजन उपलब्ध कराना केवल राहत कार्य नहीं, बल्कि मुश्किल समय में इंसान के साथ मजबूती से खड़े होने की सच्ची भावना है।

बाढ़ के कारण जब कई परिवार अपने घर-गृहस्थी और रोजमर्रा की जरूरतों को लेकर परेशान हैं, ऐसे समय में उनके लिए भोजन की व्यवस्था करना राहत के साथ-साथ अपनत्व और भरोसे का एहसास भी कराता है।

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कुरुषपाल और आसपास के गांवों में किया गया यह सेवा कार्य इस बात का संदेश देता है कि संकट कितना भी बड़ा हो, सेवा और मानवता के हाथ जरूरतमंदों तक पहुंचते रहेंगे। आपदा की इस घड़ी में एक-दूसरे के सुख-दुख में सहभागी बनकर प्रभावित परिवारों के साथ खड़ा होना ही सच्ची सामाजिक जिम्मेदारी है।

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