मावली परघाव में उमड़ा आस्था का जनसैलाब, मां मावली की अगवानी में झलकी बस्तर की परंपरा

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक किरण देव और बस्तर धाकड़ क्षत्रिय राजपूत समाज के संरक्षक कुमार जयदेव ने दी बस्तर दशहरा और विजयादशमी की शुभकामनाएं


दंतेश्वरी मंदिर में दो देवियों के मिलन का साक्षी बना बस्तर, करीब छह सौ साल पुरानी परंपरा का हुआ निर्वहन

जगदलपुर। विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा महापर्व के अंतर्गत मावली परघाव की पावन रस्म श्रद्धा, आस्था और पारंपरिक उल्लास के साथ संपन्न हुई। मां मावली की डोली और मां दंतेश्वरी के छत्र के आगमन के साथ जगदलपुर में दो देवियों के मिलन का ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। इस पावन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन और अगवानी के लिए उमड़े। पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

मावली परघाव बस्तर दशहरा के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक विधानों में से एक है। इस रस्म में दंतेवाड़ा से मां मावली की डोली और मां दंतेश्वरी के छत्र के आगमन पर पारंपरिक विधि-विधान से स्वागत किया जाता है। बस्तर की इस ऐतिहासिक परंपरा में राजपरिवार, पारंपरिक मांझी-चालकी, पुजारियों, सेवादारों और श्रद्धालुओं की महत्वपूर्ण सहभागिता रहती है।

छह सौ साल से निभाई जा रही ऐतिहासिक परंपरा

मावली परघाव की परंपरा लगभग छह सौ साल पुरानी मानी जाती है। यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि बस्तर के राजपरिवार, जनजातीय समाज और स्थानीय देवी-देवताओं से जुड़ी ऐतिहासिक आस्था का प्रतीक है। पीढ़ियों से चली आ रही यह परंपरा बस्तर की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को जीवंत बनाए हुए है।

मां मावली की अगवानी के दौरान श्रद्धालुओं की उपस्थिति और पारंपरिक रीति-रिवाजों ने बस्तर दशहरा की भव्यता को और बढ़ा दिया। यह रस्म बस्तर की सामाजिक एकजुटता, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत की अनूठी झलक प्रस्तुत करती है।

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किरण देव ने दी बस्तर दशहरा की शुभकामनाएं

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं जगदलपुर विधायक किरण देव ने बस्तर दशहरा और मावली परघाव के पावन अवसर पर समस्त बस्तरवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने मां मावली और मां दंतेश्वरी से बस्तर अंचल में सुख-समृद्धि, शांति, खुशहाली और निरंतर प्रगति की कामना की।

किरण देव ने कहा कि मावली परघाव बस्तर दशहरा की सबसे महत्वपूर्ण और भावनात्मक रस्मों में से एक है। यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि बस्तर की सदियों पुरानी परंपरा, जनजातीय संस्कृति और अटूट आस्था का जीवंत प्रतीक है। माता मावली के आगमन और उनके पारंपरिक स्वागत का विशेष महत्व है। बस्तरवासी इस आयोजन को श्रद्धा, उल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाते हैं।

कुमार जयदेव बोले—बस्तर दशहरा यहां के ग्रामीणों की परंपरा

बस्तर धाकड़ क्षत्रिय राजपूत समाज के संरक्षक कुमार जयदेव ने भी मावली परघाव और विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि बस्तर के लोग सीधे-सादे और सरल स्वभाव के हैं तथा बस्तर दशहरा यहां की आस्था और परंपराओं से जुड़ा उत्सव है।

कुमार जयदेव ने बताया कि उनके समाज की ओर से मावली मंदिर में पंचमी से ग्रामीणों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई थी, ताकि दूर-दराज से आने वाले ग्रामीणों को सुविधा मिल सके।

उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा की परंपरा यहां के ग्रामीणों की है, न कि किसी व्यक्ति विशेष की। इस परंपरा को जितना अधिक सुंदर और व्यवस्थित बनाया जाएगा, उतना ही बस्तर के लोगों के लिए बेहतर होगा।

मावली परघाव के अवसर पर आस्था, परंपरा और सामाजिक सहभागिता का यह संगम एक बार फिर बस्तर दशहरा की विशिष्ट पहचान को सामने लाया। मां मावली और मां दंतेश्वरी के पावन मिलन ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया और बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रति गौरव की भावना को और मजबूत किया।

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