आस्था, परंपरा और भव्यता के साथ मनाया जाएगा बस्तर दशहरा 2026,यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराने का संकल्प, श्री बलराम मांझी बने बस्तर दशहरा समिति के नए उपाध्यक्ष

जगदलपुर। विश्वप्रसिद्ध ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत 75 दिवसीय बस्तर दशहरा पर्व 2026 को पारंपरिक गरिमा, आस्था और पूरी भव्यता के साथ मनाने को लेकर मंगलवार को कलेक्टोरेट के प्रेरणा कक्ष में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बस्तर सांसद एवं बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में बस्तर राजपरिवार के सदस्य कमलचंद भंजदेव, कलेक्टर आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा, जिला पंचायत सीईओ तन्मय खन्ना, दंतेवाड़ा से मां दंतेश्वरी के पुजारी जिया बाबा सहित समस्त मांझी-चालकी, मेंबर-मेंबरीन, पुजारी, प्रशासनिक अधिकारी एवं टेम्पल स्टेट समिति के सदस्य उपस्थित रहे।

बलराम मांझी निर्विरोध नहीं, मतदान से चुने गए उपाध्यक्ष

बैठक की शुरुआत औपचारिक प्रक्रियाओं के बाद बस्तर दशहरा समिति के उपाध्यक्ष पद के निर्वाचन से हुई। बचेली परगना के बीरो मांझी ने अर्जुन मांझी के नाम का प्रस्ताव रखा, जबकि सोनाबाल परगना के समुन्द मांझी ने बलराम मांझी का नाम प्रस्तावित किया। सदस्यों द्वारा हाथ उठाकर कराए गए मतदान में बलराम मांझी को स्पष्ट बहुमत प्राप्त हुआ। इसके बाद उन्हें बस्तर दशहरा समिति का नया उपाध्यक्ष निर्वाचित घोषित किया गया।

दशहरा के लिए प्रतिवर्ष डेढ़ करोड़ रुपये CSR सहायता की मांग

बैठक को संबोधित करते हुए सांसद एवं समिति अध्यक्ष महेश कश्यप ने कहा कि बस्तर दशहरा केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और विश्व की अनूठी सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक पर्व की व्यवस्थाओं को और मजबूत करने के लिए एनएमडीसी प्रबंधन से सीएसआर मद के तहत प्रतिवर्ष कम से कम डेढ़ करोड़ रुपये की स्थायी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की मांग की जाएगी।

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सांसद ने बताया कि बस्तर दशहरा के राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार-प्रसार को लेकर केंद्रीय मंत्रियों से सकारात्मक चर्चा हुई है। उन्होंने कहा कि 75 दिवसीय बस्तर दशहरा के दौरान किसी भी समानांतर आयोजन की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, ताकि पर्व की मूल परंपरा और धार्मिक स्वरूप की गरिमा बनी रहे।

उन्होंने देवस्थलों में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने तथा प्रमुख पूजा विधान स्थलों पर सुरक्षा रेलिंग, पक्की बुनियादी सुविधाएं एवं अन्य आवश्यक इंतजाम करने पर भी जोर दिया।

1423 से निरंतर चली आ रही परंपरा, UNESCO सूची में शामिल कराने का संकल्प

बस्तर राजपरिवार के सदस्य एवं माटी पुजारी कमलचंद भंजदेव ने बस्तर दशहरा के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्ष 1423 से निरंतर चली आ रही बस्तर दशहरा की परंपरा मैसूर और कुल्लू दशहरा से भी प्राचीन है। उन्होंने बस्तर दशहरा को यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराने के साझा संकल्प को दोहराया।

उन्होंने मावली परघाव के लिए संबंधित स्थल एवं मार्ग की विशेष साफ-सफाई, देवी-देवताओं एवं आंगा देव के सम्मानपूर्वक आगमन की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया। साथ ही मांझी-चालकी से पारंपरिक वेशभूषा एवं पगड़ी धारण कर पर्व की गरिमा बनाए रखने का आग्रह किया।

भंजदेव ने मेंबर-मेंबरीन के मासिक मानदेय में वृद्धि का प्रस्ताव भी बस्तर दशहरा समिति के समक्ष रखा।

1.21 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावितबैठक में दशहरा समिति के सचिव एवं तहसीलदार ने 1 करोड़ 21 लाख रुपये का बजट प्रस्ताव रखा। उन्होंने बस्तर दशहरा पर्व के दौरान होने वाले विभिन्न पूजा विधान एवं उनके सफल संपादन के लिए प्रस्तावित व्यवस्थाओं की जानकारी दी।

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नव-निर्वाचित उपाध्यक्ष बलराम मांझी ने भी देवसराय सहित अन्य महत्वपूर्ण स्थलों की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के संबंध में सुझाव दिए।

बैठक के दौरान कलेक्टर आकाश छिकारा एवं पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा ने बस्तर दशहरा पर्व को शांतिपूर्ण, व्यवस्थित और भव्य रूप से संपन्न कराने के लिए प्रशासनिक तैयारियों, सुरक्षा व्यवस्था तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर अपने विचार रखे।

बैठक में मौजूद सभी सदस्यों ने बस्तर की सदियों पुरानी परंपरा, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत की गरिमा को बनाए रखते हुए बस्तर दशहरा 2026 को ऐतिहासिक एवं भव्य स्वरूप में आयोजित करने पर जोर दिया।

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