10 अगस्त तक सात सूत्रीय समझौते का पालन नहीं हुआ तो बस्तर में शुरू होगा ‘काम रोको अभियान’ : नवनीत चाँद

जगदलपुर। बस्तर के अनुसूचित क्षेत्र स्थित ग्राम पंचायत डोंगरीगुड़ा उर्फ कुमार मरेंगा, दंडकारण्य टिप-ट्राला संघ तथा बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) तोकापाल से मुलाकात कर विस्तृत ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि 23 मार्च 2026 को जिला प्रशासन की उपस्थिति में एनएमडीसी, ग्राम पंचायत एवं स्थानीय प्रतिनिधियों के बीच हुए सात बिंदुओं के लिखित समझौते का 10 अगस्त 2026 तक शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित कराया जाए।

प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व दंडकारण्य टिप-ट्राला संघ के सचिव, बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा के मुख्य संयोजक एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के बस्तर संभाग अध्यक्ष नवनीत चाँद ने किया। इस दौरान संघ के अध्यक्ष बलराम मौर्य, ग्राम पंचायत डोंगरीगुड़ा उर्फ कुमार मरेंगा की सरपंच, ग्रामवासी एवं संघ के पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।

ज्ञापन में कहा गया कि जिला प्रशासन की मध्यस्थता में हुआ लिखित समझौता केवल एक प्रशासनिक दस्तावेज नहीं, बल्कि स्थानीय समुदाय, ग्राम सभा और एनएमडीसी के बीच स्थापित विश्वास का आधार है। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि यदि प्रशासन की मौजूदगी में हुए समझौते और बाद में दिए गए लिखित आश्वासनों का भी पालन नहीं होता है, तो इससे स्थानीय जनता के विश्वास और प्रशासनिक जवाबदेही दोनों पर सवाल खड़े होते हैं।

प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन में पाँचवीं अनुसूची, पेसा अधिनियम, छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम तथा ग्राम सभा की संवैधानिक व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में स्थानीय समुदाय की भागीदारी और अधिकारों का सम्मान सुनिश्चित किया जाना चाहिए। स्थानीय रोजगार एवं परिवहन व्यवस्था से जुड़े मामलों में ग्राम सभा की अनुशंसा की अनदेखी इन संवैधानिक प्रावधानों की मूल भावना के विपरीत है।

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इस अवसर पर नवनीत चाँद ने कहा कि यह किसी कंपनी या संस्था के खिलाफ संघर्ष नहीं, बल्कि बस्तर के युवाओं के रोजगार, ग्राम सभा की गरिमा और संविधान प्रदत्त अधिकारों के सम्मान का विषय है। उन्होंने कहा कि यदि जिला प्रशासन की मौजूदगी में हुए लिखित समझौते भी लागू नहीं होंगे, तो जनता प्रशासन और सार्वजनिक उपक्रमों के आश्वासनों पर विश्वास कैसे करेगी। उनकी मांग केवल इतनी है कि जो बातें लिखित रूप से स्वीकार की गई हैं, उनका ईमानदारी से पालन किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि बस्तर के प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित परियोजनाओं में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता मिलना सामाजिक न्याय और सहभागी विकास की अनिवार्य शर्त है।

दंडकारण्य टिप-ट्राला संघ के अध्यक्ष बलराम मौर्य ने कहा कि संघ ने हर स्तर पर संवाद का रास्ता अपनाया है तथा प्रशासन के प्रत्येक आह्वान पर सहयोग किया है। अब समय आ गया है कि एनएमडीसी भी अपने लिखित वचनों का सम्मान करते हुए समझौते के बिंदुओं पर ठोस कार्रवाई करे। उन्होंने कहा कि यदि 10 अगस्त तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती है, तो स्थानीय जनता लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से अपने अधिकारों की आवाज बुलंद करेगी।

ग्राम पंचायत डोंगरीगुड़ा उर्फ कुमार मरेंगा की सरपंच ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था है। ग्राम सभा के निर्णयों, प्रशासनिक बैठकों और लिखित समझौतों का सम्मान किया जाना चाहिए। स्थानीय विकास और रोजगार से जुड़े निर्णयों में ग्राम सभा की भागीदारी केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि संवैधानिक दायित्व है।

संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि 10 अगस्त 2026 तक सातों बिंदुओं पर लिखित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित नहीं की जाती, तो ग्राम सभा, ग्राम पंचायत एवं दंडकारण्य टिप-ट्राला संघ भारतीय संविधान के तहत प्राप्त लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग करते हुए शांतिपूर्ण धरना, जनसभा, ज्ञापन, जनजागरण अभियान तथा “काम रोको अभियान” शुरू करेंगे। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि प्रस्तावित आंदोलन पूरी तरह अहिंसात्मक, संविधानसम्मत एवं विधि के अनुरूप होगा।

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हालांकि प्रतिनिधिमंडल ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पहली प्राथमिकता आंदोलन नहीं, बल्कि संवाद, आपसी विश्वास, न्यायपूर्ण समाधान तथा जिला प्रशासन की मध्यस्थता में हुए लिखित समझौते का सम्मानपूर्वक क्रियान्वयन है। अंत में उन्होंने जिला प्रशासन एवं एनएमडीसी प्रबंधन से समय-सीमा के भीतर सकारात्मक निर्णय लेकर स्थानीय युवाओं के रोजगार, ग्राम सभा के अधिकारों और प्रशासन की विश्वसनीयता बनाए रखने की अपील की, ताकि किसी प्रकार की आंदोलनात्मक स्थिति उत्पन्न न हो।

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