जगदलपुर, 15 जुलाई 2026। किसानों के हितों की सुरक्षा तथा गुणवत्तापूर्ण कृषि आदानों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कृषि विभाग ने उर्वरक नियमों के उल्लंघन के मामलों में कड़ी कार्रवाई की है। विभाग द्वारा दो अलग-अलग मामलों में एफआईआर दर्ज कराई गई है, वहीं एक कृषि केंद्र का उर्वरक प्राधिकार पत्र निरस्त कर दिया गया है।

कृषकों से प्राप्त शिकायतों के आधार पर की गई जांच में प्रथम दृष्टया विकासखंड जगदलपुर अंतर्गत कुम्हरावण्ड स्थित दन्तेश्वरी कृषि केन्द्र द्वारा उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 के प्रावधानों का उल्लंघन पाया गया। इसके बाद कृषि विभाग ने संबंधित फर्म का उर्वरक प्राधिकार पत्र तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया। साथ ही फर्म संचालक के विरुद्ध थाना फ्रेजरपुर, जिला बस्तर में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
एक अन्य मामले में 8 जुलाई 2026 को किसानों से प्राप्त शिकायत के आधार पर जांच में पाया गया कि बिना वैध उर्वरक प्राधिकार पत्र के डीएपी के नाम पर अन्य उर्वरक का निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर विक्रय किया जा रहा था। जांच में प्रथम दृष्टया उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के उल्लंघन के प्रमाण मिलने पर मनोज कुमार बेदरकर एवं जीवन जंघेल के विरुद्ध थाना बोधघाट में एफआईआर दर्ज कराई गई है।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि यदि कोई विक्रेता निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर उर्वरक बेचता है, संदेहास्पद गुणवत्ता के उर्वरक, बीज अथवा कीटनाशक उपलब्ध कराता है या किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो इसकी सूचना तत्काल कृषि विभाग को दें, ताकि दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।






