तीन दशक का इंतजार खत्म! इंद्रावती के जंगलों में गूंजेगी पर्यटकों की आवाजाही, 9 KM का सफारी ट्रैक तैयार

नक्सलवाद के साये से बाहर निकल पर्यटन की राह पर बीजापुर, मंत्री केदार कश्यप ने किया जंगल सफारी का वर्चुअल शुभारंभ; चार जिप्सियों से शुरू हुई सुविधा, 2 हजार रुपये होगा शुल्क।

जगदलपुर। बस्तर के घने जंगल अब पर्यटकों के रोमांच और आकर्षण का नया केंद्र बनने की ओर बढ़ रहे हैं। कभी नक्सल गतिविधियों और सुरक्षा चुनौतियों के कारण आम लोगों की पहुंच से दूर रहे बीजापुर के इंद्रावती टाइगर रिजर्व में अब पर्यटन का नया अध्याय शुरू हो गया है। करीब तीन दशक के लंबे अंतराल के बाद यहां जंगल सफारी की शुरुआत की गई है। 1 नवंबर से पर्यटक जिप्सी में बैठकर इंद्रावती के प्राकृतिक सौंदर्य और वन्यजीवों को करीब से देखने का अनुभव ले सकेंगे।

रविवार सुबह 8 बजे वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जंगल सफारी का वर्चुअल शुभारंभ किया। इसके साथ ही पर्यटकों के लिए ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा भी शुरू कर दी गई है।

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9 किलोमीटर के रास्ते पर होगा जंगल का रोमांच

वन विभाग ने सफारी के लिए उल्लूर गांव से सरांड तक लगभग 9 किलोमीटर लंबा ट्रैक तैयार किया है। शुरुआती दौर में चार जिप्सियों के जरिए पर्यटकों को जंगल भ्रमण कराया जाएगा। सफारी का शुल्क 2,000 रुपये निर्धारित किया गया है। पर्यटकों की सुविधा के लिए प्रवेश स्थल पर आकर्षक प्रवेश द्वार और टिकट काउंटर भी बनाया गया है।

जहां कभी था नक्सलवाद का प्रभाव, अब वहां पर्यटन की तैयारी

इंद्रावती टाइगर रिजर्व का जंगल लंबे समय तक नक्सल गतिविधियों और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के कारण सुर्खियों में रहा। दुर्गम वन क्षेत्र और नक्सल प्रभाव के चलते यहां पर्यटन गतिविधियों का विस्तार नहीं हो सका था। अब परिस्थितियों में बदलाव के साथ इस प्राकृतिक संपदा को पर्यटकों के सामने लाने की पहल की गई है।

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सफारी के दौरान पर्यटक घने जंगल, विशाल वृक्षों, हरियाली और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को करीब से देख सकेंगे। वन विभाग की इस पहल में पर्यटन के साथ वन एवं वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार का अवसर

इंद्रावती टाइगर रिजर्व के डीएफओ एसएस सोरी के मुताबिक, सफारी संचालन के लिए चार जिप्सियों की व्यवस्था की गई है। स्थानीय युवाओं को गाइड और वाहन चालक के रूप में प्रशिक्षण भी दिया गया है। इससे जंगल सफारी के संचालन में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के साथ उनके लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।

बस्तर पर्यटन को मिलेगी नई पहचान

इंद्रावती टाइगर रिजर्व में सफारी की शुरुआत केवल एक पर्यटन गतिविधि नहीं, बल्कि बीजापुर की बदलती तस्वीर का संकेत भी है। इससे बस्तर के प्राकृतिक सौंदर्य को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने की संभावनाएं बढ़ेंगी। पर्यटकों की आवाजाही से स्थानीय अर्थव्यवस्था और ग्रामीण आजीविका को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।

नक्सलवाद के लंबे दौर के बाद इंद्रावती के जंगलों में शुरू हुई यह पहल अब बीजापुर को पर्यटन के नए नक्शे पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

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