माता दंतेश्वरी के जयघोष के बीच प्रधान पुजारी, सर्व समाज के प्रतिनिधियों, सिरहा-गुनिया और श्रद्धालुओं ने निभाई परंपरा
जगदलपुर। विश्वप्रसिद्ध ऐतिहासिक बस्तर दशहरा की पारंपरिक धार्मिक रस्मों के अंतर्गत मावली माता मंदिर में विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान मां दंतेश्वरी मंदिर के प्रधान पुजारी, सर्व समाज के ब्राह्मण, पुजारी, सिरहा-गुनिया और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। माता के जयघोष के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

प्रशासन की देखरेख में तहसीलदार सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों की उपस्थिति में मावली माता मंदिर में दीप प्रज्वलित कर पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान माता के मंदिर में विराजित पवित्र तलवार (खंडवा) की परंपरानुसार पूजा की गई। धार्मिक विधि-विधान के अंतर्गत कल्कि भगवान एवं प्रभु श्रीराम का स्मरण कर पूजा-अर्चना संपन्न की गई।

इसके पश्चात बस्तर दशहरे की पारंपरिक रस्म के अनुसार जोगी द्वारा पवित्र तलवार अथवा खंडवा को लेकर सिरहासार भवन में भेंट करने की परंपरा निभाई जाती है।

इस संपूर्ण धार्मिक आयोजन में मुंडा बाजा की गूंज और बस्तर की पारंपरिक बोली में गाए जाने वाले माता के पूजा गीतों ने स्थानीय संस्कृति, आस्था और जनजातीय परंपराओं की अनूठी छटा बिखेरी।
यह आयोजन बस्तर दशहरे की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पीढ़ियों से चली आ रही धार्मिक परंपराओं का प्रतीक है।






