जगदलपुर में पत्रकारों से चर्चा, गुजरात से लेकर केंद्र सरकार तक विकास और व्यवस्थागत बदलावों का किया उल्लेख
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने सोमवार को जगदलपुर के एक निजी होटल में पत्रकारों से चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल से लेकर प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल तक विभिन्न विकास कार्यों और व्यवस्थागत बदलावों का उल्लेख किया।

उपमुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि 7 अक्टूबर 2001 को नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पदभार संभाला था। उन्होंने गुजरात में शासन व्यवस्था में हुए संस्थागत बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं को मजबूत करने, सरकारी व्यवस्था में सक्रियता लाने और जनसरोकार से जुड़े कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
सहकारी संस्थाओं और डेयरी मॉडल का किया उल्लेख
श्री शर्मा ने सहकारी संस्थाओं और डेयरी क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि गुजरात में सहकारी संस्थाओं ने बड़े स्तर पर व्यवसाय खड़ा किया और उसके लाभांश का लाभ किसानों एवं पशुपालकों तक पहुंचा। उन्होंने अमूल सहित जिला स्तर पर संचालित डेयरी सहकारी व्यवस्थाओं का भी उल्लेख किया।
तकनीक से शिक्षा व्यवस्था की निगरानी
उपमुख्यमंत्री ने विद्या समीक्षा केंद्र का उल्लेख करते हुए कहा कि तकनीक के माध्यम से स्कूल शिक्षा की निगरानी और विद्यार्थियों के सीखने के परिणामों को समझने की व्यवस्था विकसित की गई है।
उन्होंने कहा कि केवल भवनों का निर्माण करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस भवन में व्यवस्था, प्रक्रिया और संस्थाओं का लगातार प्रभावी ढंग से संचालन होना अधिक महत्वपूर्ण है।
उन्होंने यह भी कहा कि नवाचार को जमीन से उठाकर व्यावसायिक उत्पादन तक ले जाने और संस्थागत प्रक्रियाओं को लगातार आगे बढ़ाने की दिशा में भी गुजरात में कार्य किया गया।
मेडिकल शिक्षा से ‘मेक इन इंडिया’ तक विकास कार्यों का उल्लेख
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केंद्र सरकार के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए मेडिकल शिक्षा, एयरपोर्ट, सुरंग, पुल, बुनियादी ढांचे और देश में उत्पादन को बढ़ावा देने वाली ‘मेक इन इंडिया’ पहल सहित विभिन्न क्षेत्रों में हुए कार्यों की चर्चा की।
उन्होंने कहा कि विकास का उद्देश्य केवल बड़े निर्माण कार्य करना नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्थाएं और प्रक्रियाएं विकसित करना है, जो लंबे समय तक निरंतर चलती रहें और समाज के विभिन्न वर्गों तक विकास का लाभ पहुंचाएं। उन्होंने इसे समावेशी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।






