जनता से बार-बार पराजित कांग्रेस अब संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास कर रही : महापौर
जगदलपुर | 30 सितंबर 2026। कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता और चुनावी प्रक्रिया को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जगदलपुर महापौर संजय पाण्डेय ने कहा कि निर्वाचन आयोग द्वारा हाल ही में जारी स्पष्टीकरण में SIR से जुड़े निर्णयों को तीनों निर्वाचन आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए जाने की बात कही गई है।

महापौर संजय पाण्डेय ने कहा कि राजनीतिक असहमति लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा है और किसी भी राजनीतिक दल को निर्वाचन आयोग से सवाल पूछने का अधिकार है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं पर लगाए जाने वाले आरोपों के पीछे ठोस तथ्य और प्रमाण होना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग के स्पष्टीकरण के बाद कांग्रेस नेतृत्व को अपने पूर्व दावों की समीक्षा करनी चाहिए। यदि लगाए गए आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं, तो राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व को निर्वाचन आयोग तथा देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए।
SIR पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का भी दिया हवाला
महापौर ने कहा कि 27 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में Special Intensive Revision (SIR) से संबंधित मामले पर निर्णय दिया था। सुप्रीम कोर्ट के आधिकारिक सारांश के अनुसार मामले में निर्वाचन आयोग की SIR कराने की शक्ति, उसके उद्देश्य, अपनाई गई प्रक्रिया और मतदाता सूची में पात्रता से जुड़े प्रश्नों पर विचार किया गया था।
उन्होंने कहा—
“जब देश की सर्वोच्च अदालत किसी प्रक्रिया से जुड़े कानूनी सवालों पर निर्णय दे चुकी हो और निर्वाचन आयोग स्वयं अपने निर्णयों की प्रक्रिया को स्पष्ट कर चुका हो, तब राजनीतिक आरोपों को भी तथ्य और प्रमाण की कसौटी पर परखा जाना चाहिए।”
चुनावी हार-जीत पर संस्थाओं पर सवाल उठाना उचित नहीं : पाण्डेय
संजय पाण्डेय ने कहा कि चुनाव में हार या जीत लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। किसी राजनीतिक दल को चुनावी परिणामों पर सवाल उठाने और कानूनी एवं संवैधानिक माध्यमों का सहारा लेने का अधिकार है, लेकिन निर्वाचन प्रक्रिया या संवैधानिक संस्थाओं पर लगाए गए आरोपों को प्रमाण के साथ सामने रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सहित सभी राजनीतिक दलों के निर्वाचित जनप्रतिनिधि इसी संवैधानिक चुनावी व्यवस्था के माध्यम से सदन तक पहुंचे हैं। इसलिए व्यवस्था में किसी प्रकार की कमी या अनियमितता की शिकायत है तो उसका समाधान संवैधानिक एवं कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना चाहिए।
“लोकतंत्र में आरोप नहीं, प्रमाण महत्वपूर्ण हैं”
महापौर ने कहा—
“लोकतंत्र केवल चुनाव जीतने का नाम नहीं है। लोकतंत्र का आधार मतदाता का विश्वास, निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान है। राजनीतिक दलों को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन संस्थाओं पर लगाए गए गंभीर आरोपों के साथ ठोस तथ्य और प्रमाण भी प्रस्तुत किए जाने चाहिए।
”उन्होंने कहा कि कांग्रेस को निर्वाचन आयोग के स्पष्टीकरण और न्यायालय के निर्णयों को गंभीरता से लेते हुए अपने आरोपों की समीक्षा करनी चाहिए।
संजय पाण्डेय ने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व को देश की जनता के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि निर्वाचन आयोग पर लगाए गए आरोपों के पीछे उनके पास क्या ठोस प्रमाण हैं। यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं, तो उन्हें निर्वाचन आयोग और देश से माफी मांगनी चाहिए।
उन्होंने कहा—“देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था किसी एक दल की नहीं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों की व्यवस्था है। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष—सभी की जिम्मेदारी है कि संविधान, चुनाव प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति जनता के विश्वास को मजबूत करें।”
— संजय पाण्डेय
महापौर, जगदलपुर






