बड़ी खबर: NMDC के खिलाफ प्रभावित पंचायतों का अनिश्चितकालीन धरना शुरू, 10 सूत्री मांगों को लेकर गेट नंबर-1 पर जुटे ग्रामीण

जगदलपुर। नगरनार स्टील प्लांट के लिए वर्ष 2001 में अधिग्रहित की गई जमीन से प्रभावित ग्राम पंचायतों और किसानों की लंबित मांगों को लेकर मंगलवार, 22 सितंबर 2026 से आंदोलन शुरू हो गया। बड़ी संख्या में भू-प्रभावित ग्रामीण, महिलाएं और बच्चे नगरनार स्थित NMDC स्टील प्लांट के मुख्य द्वार गेट नंबर-1 के सामने धरने पर बैठ गए।

ग्रामीणों का कहना है कि अपनी पुश्तैनी जमीन स्टील प्लांट के लिए देने के बावजूद कई परिवार आज भी रोजगार और मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी मांगों के समाधान का इंतजार कर रहे हैं। आंदोलनकारियों ने अपनी 10 सूत्री मांगों को लेकर धरना शुरू किया है और मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन को आगे बढ़ाने की चेतावनी दी है।

एक साल से पत्राचार, अब धरने का रास्ता

प्रदर्शनकारियों के अनुसार प्रभावित ग्रामीणों और किसानों की समस्याओं को लेकर पिछले करीब एक वर्ष से NMDC प्रबंधन को लगातार पत्राचार और ज्ञापन के माध्यम से अवगत कराया जाता रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार मांगें रखने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण अब धरना-प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा है।

ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर वे कब तक केवल ज्ञापन और आश्वासन के भरोसे अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाते रहेंगे। उनका कहना है कि अब उन्हें आश्वासन नहीं, बल्कि मांगों पर ठोस और समयबद्ध कार्रवाई चाहिए।

महिलाओं ने हल्बी-भतरी बोली में बयां किया दर्द

धरने में शामिल महिलाओं ने हल्बी-भतरी बोली में अपनी पीड़ा व्यक्त की। महिलाओं का कहना है कि स्टील प्लांट के लिए जमीन अधिग्रहण के दौरान रोजगार और सुविधाओं को लेकर उम्मीदें दिखाई गई थीं, लेकिन जमीन चले जाने के बाद भी कई प्रभावित परिवार रोजगार के इंतजार में हैं।

इसे भी पढ़िए -   भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए हुआ महामृत्युंजय मंत्र जप एवं पूर्णाहुति हवन

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जिस जमीन पर आज विशाल स्टील प्लांट खड़ा है, उसी जमीन से कभी उनके परिवारों की पीढ़ियों की आजीविका जुड़ी हुई थी।

पुश्तैनी जमीन गई, रोजगार अब भी लंबित

ग्रामीणों के मुताबिक, वर्ष 2010 में चिन्हित 1152 प्रभावित किसानों में से अभी भी कुछ किसानों को रोजगार मिलना बाकी है। आंदोलनकारियों ने शेष पात्र प्रभावित किसानों को रोजगार देने की मांग उठाई है।

इसके साथ ही स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने तथा रोजगार के लिए निर्धारित अधिकतम आयु सीमा 33 वर्ष से बढ़ाकर 40 वर्ष करने की मांग भी की गई है।

खेतों में काला पानी जमा होने का आरोप

धरने पर बैठे ग्रामीणों ने प्लांट से लगे गांवों में जल निकासी की समस्या को भी प्रमुखता से उठाया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्लांट क्षेत्र से निकलने वाला गंदा और काला पानी कई स्थानों पर खेतों में जमा हो जाता है, जिससे फसलों को नुकसान पहुंच रहा है।

ग्रामीणों ने दूषित पानी से प्रभावित फसलों का उचित मुआवजा देने, जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त करने और प्रभावित क्षेत्रों में नाली तथा अन्य जरूरी सुविधाओं के विस्तार की मांग की है।

सड़क से लेकर अस्पताल और शिक्षा तक की मांग

आंदोलनकारियों ने जगदलपुर-नगरनार मार्ग को सिक्स-लेन करने की मांग भी रखी है। इसके अलावा प्रभावित ग्राम पंचायतों में शिक्षा, पेयजल, बिजली, सड़क, नाली, जल निकासी और खेल सुविधाओं के विस्तार की मांग की गई है।

ग्रामीणों ने NMDC की ओर से प्रस्तावित/वादा किए गए सुपर स्पेशलिटी अस्पताल से जुड़े अधूरे वादे को पूरा करने की मांग भी उठाई है।

इसे भी पढ़िए -   माँ दंतेश्वरी के चरणों में नवदायित्व का संकल्प, भाजयुमो पदाधिकारियों ने संगठन मजबूती का लिया प्रण

ITI में रोजगारपरक प्रशिक्षण की मांग

स्थानीय युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रभावित क्षेत्र में ITI के माध्यम से रोजगारपरक तकनीकी प्रशिक्षण शुरू करने की मांग भी आंदोलनकारियों ने रखी है, ताकि स्थानीय युवाओं को तकनीकी कौशल के साथ रोजगार के अवसर मिल सकें।

सांस्कृतिक आयोजनों के लिए सहयोग राशि बढ़ाने की मांगप्रभावित पंचायतों से जुड़े सांस्कृतिक आयोजनों और स्थानीय परंपराओं के संरक्षण के लिए सहयोग राशि बढ़ाने की मांग भी 10 सूत्री मांगों में शामिल है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र के विकास के साथ स्थानीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

प्रभावित पंचायतों को मिले आधिकारिक दर्जा

आंदोलनकारियों ने प्रभावित पंचायतों को आधिकारिक रूप से भू-प्रभावित ग्राम पंचायत का दर्जा देने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि जमीन अधिग्रहण से प्रभावित पंचायतों की समस्याओं और विकास संबंधी जरूरतों को अलग से प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

समाधान तक आंदोलन जारी रखने की बातग्रामीणों ने कहा कि उनकी मांगें लंबे समय से लंबित हैं। अब वे केवल आश्वासन के आधार पर आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे। प्रदर्शनकारियों ने मांगों पर ठोस पहल नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को आने वाले दिनों में और व्यापक करने की चेतावनी दी है।

गेट नंबर-1 के सामने चल रहे इस धरने में बड़ी संख्या में भू-प्रभावित ग्रामीणों के साथ महिलाएं और बच्चे भी मौजूद रहे। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि जमीन अधिग्रहण से जुड़े रोजगार और अधिकारों के साथ-साथ सड़क, जल निकासी, पेयजल, शिक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मुद्दों का स्थायी समाधान उनकी प्रमुख मांग है।

Latest News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *