समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए एग्रीस्टेक और बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य, 31 अक्टूबर तक कराएं पंजीयन और खसरा संशोधन, डिजिटल व्यवस्था से होगी पारदर्शी धान खरीदी

जगदलपुर, 03 अगस्त 2026। खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुगम और तकनीक आधारित बनाने के लिए राज्य शासन ने व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कलेक्टर आकाश छिकारा के निर्देशानुसार इस वर्ष बस्तर जिले के सभी श्रेणी के किसानों के लिए एग्रीस्टेक पोर्टल पर पंजीयन अनिवार्य कर दिया गया है। शासन का उद्देश्य आधुनिक तकनीक के माध्यम से वास्तविक एवं पात्र किसानों को शासकीय योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करना है।

जिले के सभी किसान, जो समर्थन मूल्य पर धान बेचना चाहते हैं, वे 31 अक्टूबर 2026 तक खाद्य विभाग की विभागीय वेबसाइट के ऑनलाइन सोसाइटी मॉड्यूल के माध्यम से अपना पंजीयन एवं खसरा संशोधन करा सकते हैं। इस वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण व्यवस्था यह है कि भारत सरकार के कृषि मंत्रालय द्वारा संचालित एग्रीस्टेक पोर्टल से फार्मर आईडी प्राप्त करना अनिवार्य होगा। इससे किसानों को अलग से एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन कराने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

धान उपार्जन केंद्रों पर इस वर्ष भी बायोमेट्रिक आधारित खरीदी प्रणाली लागू रहेगी, जिससे केवल वास्तविक किसान या उनके अधिकृत प्रतिनिधि ही अपनी उपज का विक्रय कर सकेंगे। इससे धान खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।

प्रशासन ने किसानों की सुविधा के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान भी किए हैं। वर्ष 2025-26 में पंजीकृत ऐसे किसानों, जिनके पास किसान कोड और एग्रीस्टेक फार्मर आईडी पहले से उपलब्ध है, उन्हें दोबारा पंजीयन कराने की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि नई भूमि खरीदने, नामांतरण, बंटवारा या फौती के कारण रकबे में परिवर्तन होने की स्थिति में संबंधित समिति में जाकर खसरा नंबर का संशोधन कराना आवश्यक होगा। पहली बार पंजीयन कराने वाले किसानों को एग्रीस्टेक पोर्टल पर पंजीयन के बाद अपनी समिति में बैंक खाता, भूमि विवरण सहित आवश्यक जानकारी दर्ज कराकर किसान कोड प्राप्त करना होगा।

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वन अधिकार पट्टाधारी, डूबान क्षेत्र के किसान तथा संस्थागत कृषकों के लिए भी एग्रीस्टेक पंजीयन अनिवार्य रहेगा। इनके सत्यापन के लिए संबंधित भूमि का जियो-टैगिंग (अक्षांश एवं देशांतर) कर फार्मर आईडी तैयार की जाएगी। वहीं अधिया, रेगहा अथवा लीज पर खेती करने वाले किसानों को एग्रीस्टेक पोर्टल के ऑथराइजेशन मॉड्यूल के माध्यम से अधिकृत किया जाएगा।

धान उत्पादन का सही आकलन सुनिश्चित करने के लिए 15 अगस्त से 31 अक्टूबर तक चलने वाले डिजिटल क्रॉप सर्वे में दर्ज रकबे को ही उपार्जन के लिए मान्य माना जाएगा। साथ ही धान खरीदी केंद्रों में स्थायी केंद्र प्रभारियों की नियुक्ति की जा रही है तथा समिति स्तर पर डाटा एंट्री ऑपरेटरों को एग्रीस्टेक आईडी प्रदान कर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बायोमेट्रिक सत्यापन के दौरान आने वाली व्यावहारिक समस्याओं के समाधान के लिए प्रत्येक खरीदी केंद्र में कलेक्टर द्वारा एक अधिकृत प्राधिकारी भी नियुक्त किया जाएगा।

जिला प्रशासन ने बस्तर जिले के सभी किसानों से अपील की है कि वे 31 अक्टूबर 2026 की अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय रहते अपने निकटतम उपार्जन केंद्र पहुंचकर पंजीयन, खसरा मैपिंग तथा बायोमेट्रिक सत्यापन की प्रक्रिया पूर्ण कर लें, ताकि धान विक्रय के समय किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

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