डाक कांवड़ यात्रा के माध्यम से गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की मांग : मुन्ना कोरी
दंडकारण्य क्षेत्र शैव साधना का प्रमुख केंद्र था : रोहन कुमार
जगदलपुर, 03 अगस्त। पवित्र श्रावण मास के अवसर पर बस्तर संभाग में द्वितीय वर्ष डाक कांवड़ यात्रा का आयोजन श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह के साथ किया गया। भारी बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में शिवभक्तों ने यात्रा में भाग लेकर भगवान भोलेनाथ के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।

यात्रा का शुभारंभ जगदलपुर के महादेव घाट स्थित इंद्रावती नदी में विधिवत जलपूजन के साथ हुआ। इसके बाद डाक बम कांवड़ियों ने लगभग 18 किलोमीटर की दूरी बिना रुके दौड़कर तय की और प्राचीन रामपाल शिव मंदिर पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया। आयोजन का उद्देश्य भगवान भोलेनाथ की आराधना के साथ सनातन परंपराओं का संरक्षण, धार्मिक जागरूकता का प्रसार तथा गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिए जाने की मांग को जन-जन तक पहुंचाना रहा।

रामपाल शिव मंदिर के पुजारी कैलाश ठाकुर ने बताया कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी उनका परिवार इस प्राचीन मंदिर में भगवान शिव की पूजा-अर्चना एवं सेवा की परंपरा का निर्वहन करता आ रहा है। स्थानीय जनश्रुति के अनुसार वनवास काल में भगवान श्रीराम ने इस शिवलिंग की स्थापना की थी, जिसके कारण यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र माना जाता है।

उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर में लगभग 18वीं शताब्दी की एक प्राचीन घंटी आज भी सुरक्षित है, जो इस स्थल की ऐतिहासिक महत्ता को दर्शाती है। स्थानीय मान्यता के अनुसार अंग्रेजी शासनकाल में भी अधिकारी एवं आमजन यहां आकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना किया करते थे।
गौ सेवक रोहन कुमार ने बताया कि रामपाल का प्राचीन शिवालय नलकालीन धरोहर है। यहां स्थापित शिवलिंग नलकाल का माना जाता है तथा वर्तमान शिवालय का निर्माण पाँचवीं-छठी शताब्दी के मध्य हुआ था। उस समय दंडकारण्य क्षेत्र शैव साधना का प्रमुख केंद्र था, जिसके कारण गाँव-गाँव में शिव मंदिरों का निर्माण हुआ। उन्होंने कहा कि पाँचवीं-छठी शताब्दी का यह प्राचीन शिवालय आज भी नियमित रूप से पूजित है और श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है।
गौ सेवक मुन्ना कोरी ने कहा कि इस डाक कांवड़ यात्रा के माध्यम से गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की मांग को भी जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था के साथ गौ संरक्षण का संदेश समाज तक पहुंचाना इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य है।
आयोजकों ने बताया कि डाक कांवड़ यात्रा का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में सनातन संस्कृति, गौ संरक्षण एवं आध्यात्मिक जागरूकता को सशक्त करना भी है। भारी वर्षा के बावजूद शिवभक्तों का उत्साह पूरे मार्ग में देखने को मिला।






