वन्यजीवों की सुरक्षा, अवैध कटाई और शिकार पर लगेगी लगाम, जल्द मिलेगा बस्तर को अपना थर्मल ड्रोन
जगदलपुर, 28 जुलाई। बस्तर के घने जंगलों और समृद्ध जैव विविधता की सुरक्षा के लिए वन विभाग ने आधुनिक तकनीक का सहारा लेना शुरू कर दिया है। अब बस्तर वन मंडल में थर्मल इमेजिंग ड्रोन कैमरे के माध्यम से दिन ही नहीं, बल्कि रात के अंधेरे में भी जंगलों की निगरानी की जा रही है। कांकेर वन मंडल के सहयोग से संचालित इस हाई-टेक निगरानी व्यवस्था से वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ-साथ अवैध कटाई, लकड़ी तस्करी और शिकार जैसी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण की दिशा में बड़ी सफलता मिल रही है।

थर्मल इमेजिंग तकनीक शरीर से निकलने वाली ऊष्मा (हीट सिग्नेचर) को पहचानने में सक्षम है। इसकी मदद से घने जंगलों और अंधेरे में भी वन्यजीवों तथा संदिग्ध मानव गतिविधियों का आसानी से पता लगाया जा सकता है। इससे वन विभाग को भालू, तेंदुआ, हाथी समेत अन्य वन्यजीवों की गतिविधियों की सटीक जानकारी मिल रही है, जिससे उनकी सुरक्षा और निगरानी पहले की तुलना में अधिक प्रभावी हो गई है।
वन विभाग इस अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए भी कर रहा है। वन क्षेत्रों से लगे ग्रामीण इलाकों में यदि हाथियों या अन्य जंगली जानवरों की मौजूदगी की सूचना मिलती है, तो थर्मल ड्रोन के माध्यम से तत्काल उनकी लोकेशन का पता लगाया जाता है। इसके बाद आसपास के ग्रामीणों को समय रहते सतर्क किया जाता है, जिससे जन-धन की हानि की आशंका काफी हद तक कम हो जाती है।
इसके अलावा जंगलों में अवैध कटाई, लकड़ी तस्करी और वन्यजीवों के शिकार जैसी गैरकानूनी गतिविधियों पर भी थर्मल ड्रोन प्रभावी हथियार साबित हो रहा है। रात के समय भी संदिग्ध गतिविधियों की पहचान कर ड्रोन से प्राप्त फुटेज के आधार पर वन विभाग की क्विक रिस्पांस टीम (QRT) तत्काल मौके पर पहुंचकर कार्रवाई कर रही है।
बस्तर के डीएफओ उत्तम गुप्ता ने बताया कि आधुनिक तकनीक के इस दौर में थर्मल ड्रोन बस्तर वन मंडल के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। फिलहाल कांकेर वन मंडल के सहयोग से ड्रोन उपलब्ध कराकर निगरानी की जा रही है और जल्द ही बस्तर वन मंडल को भी अपना अत्याधुनिक थर्मल ड्रोन मिल जाएगा। उन्होंने कहा कि इस तकनीक से रात्रिकालीन गश्त अधिक प्रभावी हुई है, वनकर्मियों की सुरक्षा बढ़ी है और बस्तर की समृद्ध जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण मदद मिल रही है। उन्होंने कहा कि वन विभाग प्राकृतिक संपदा और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रहा है।






