जल जीवन मिशन की अधूरी योजनाओं, इंद्रावती बेसिन विकास और सिंचाई परियोजनाओं के लिए केंद्र से विशेष पैकेज की मांग
जगदलपुर। बस्तर लोकसभा क्षेत्र में स्वच्छ पेयजल, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और जल संरक्षण को लेकर सांसद महेश कश्यप ने केंद्र सरकार के समक्ष चार महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे हैं। नई दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ भवन में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में सांसद ने जल जीवन मिशन, पेयजल आपूर्ति, सिंचाई विकास और इंद्रावती नदी बेसिन के समग्र विकास से जुड़े विस्तृत प्रस्ताव सौंपे। बैठक में छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव सहित प्रदेश के सांसद भी उपस्थित रहे।

सांसद महेश कश्यप ने केंद्रीय मंत्री को सौंपे गए पत्रों में बस्तर की भौगोलिक, जनजातीय और पूर्व नक्सल प्रभावित परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि क्षेत्र की विशेष आवश्यकताओं के अनुरूप अलग कार्ययोजना तैयार करना जरूरी है। उन्होंने बताया कि बस्तर, कोंडागांव, नारायणपुर, कांकेर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिलों में जल जीवन मिशन के तहत अनेक योजनाएं अब भी अधूरी हैं।

उन्होंने कहा कि कई गांवों में ओवरहेड टैंक बन चुके हैं, लेकिन पाइपलाइन नहीं जुड़ी है। कहीं पाइपलाइन बिछने के बावजूद नल कनेक्शन नहीं दिए गए हैं, तो कई स्थानों पर कनेक्शन होने के बाद भी नियमित जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। इसके कारण दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों के हजारों ग्रामीण आज भी पेयजल संकट का सामना कर रहे हैं।

सांसद ने मांग की कि जल जीवन मिशन के सभी कार्यों की उच्चस्तरीय तकनीकी एवं वित्तीय जांच कराई जाए। अधूरे कार्यों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हो, सभी लंबित परियोजनाओं को तय समय-सीमा में पूरा कराया जाए तथा प्रत्येक योजना का स्वतंत्र थर्ड पार्टी ऑडिट कराया जाए। उन्होंने बस्तर जैसे विशेष क्षेत्रों के लिए अलग मॉनिटरिंग व्यवस्था विकसित करने का भी आग्रह किया।

एक अन्य प्रस्ताव में सांसद महेश कश्यप ने बस्तर के लिए विशेष जल संसाधन एवं सिंचाई विकास पैकेज स्वीकृत करने की मांग रखी। उन्होंने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत लंबित परियोजनाओं को प्राथमिकता देने, चेक डैम, स्टॉप डैम, एनीकट और लिफ्ट सिंचाई योजनाओं का विस्तार करने, लघु एवं मध्यम सिंचाई परियोजनाओं के लिए विशेष केंद्रीय सहायता उपलब्ध कराने तथा पुराने सिंचाई ढांचों के आधुनिकीकरण के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता देने का अनुरोध किया।

सांसद ने इंद्रावती नदी बेसिन के समग्र विकास के लिए “इंद्रावती नदी बेसिन समग्र विकास परियोजना” को मंजूरी देने की भी मांग की। उन्होंने जलग्रहण क्षेत्र विकास, वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, नदी तट संरक्षण, पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन और जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण के लिए विशेष केंद्रीय सहयोग उपलब्ध कराने का आग्रह किया।
अपने चौथे प्रस्ताव में सांसद ने जल जीवन मिशन के तहत तैयार हो चुकी पेयजल योजनाओं को तत्काल चालू कराने, जहां अधोसंरचना पूरी हो चुकी है वहां नियमित जलापूर्ति शुरू करने, सौर ऊर्जा आधारित पेयजल योजनाओं को प्राथमिकता देने तथा संचालन एवं रखरखाव के लिए ग्राम पंचायतों को आवश्यक वित्तीय एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने की मांग की।
सांसद महेश कश्यप ने कहा कि बस्तर की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए केंद्र सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विशेष दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र सरकार बस्तर की जरूरतों को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक निर्णय करेगी, जिससे हर ग्रामीण परिवार तक सुरक्षित पेयजल पहुंचेगा और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से किसानों को भी व्यापक लाभ मिलेगा।






