बाहुड़ा गोंचा महापर्व की भक्ति के बीच कांग्रेस की भूख हड़ताल की राजनीति दुर्भाग्यपूर्ण : अभिषेक तिवारी

जगदलपुर, 24 जुलाई। भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) बस्तर के जिला उपाध्यक्ष अभिषेक तिवारी ने कहा है कि आज पूरा बस्तर प्रभु श्री जगन्नाथ के पावन बाहुड़ा गोंचा महापर्व की भक्ति में सराबोर है। चारों ओर श्रद्धा, सेवा और उत्साह का वातावरण है। भगवान श्री जगन्नाथ की रथयात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल होकर दर्शन कर रहे हैं तथा विभिन्न स्थानों पर महाप्रसाद का वितरण किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि ऐसे पावन अवसर पर, जब पूरा समाज धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव में सहभागी बना हुआ है, तब कांग्रेस द्वारा भूख हड़ताल आयोजित कर विरोध का माहौल बनाने का प्रयास दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके अनुसार, यह समय समाज को जोड़ने और उत्सव की भावना को मजबूत करने का है, न कि राजनीतिक टकराव का वातावरण बनाने का।

अभिषेक तिवारी ने कहा कि कांग्रेस जिस विषय को लेकर आंदोलन कर रही है, वह नीट परीक्षा से संबंधित है। उन्होंने कहा कि इस मामले में पुनः परीक्षा आयोजित की जा चुकी है और अनेक विद्यार्थियों ने सफलता प्राप्त कर अपने शैक्षणिक जीवन की नई शुरुआत की है। उन्होंने दावा किया कि बस्तर अंचल के भी कई विद्यार्थियों को इसका लाभ मिला है। ऐसे में कांग्रेस को छात्रों के भविष्य को राजनीतिक मुद्दा बनाने के बजाय सकारात्मक सहयोग करना चाहिए।

उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को भी राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बताया। उनका कहना था कि पूर्व में भी विभिन्न परीक्षाओं से जुड़े विवाद सामने आए, लेकिन उस समय इस प्रकार की मांग नहीं उठाई गई। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की नई शिक्षा नीति भारतीय ज्ञान परंपरा, देश के गौरवशाली इतिहास और भारतीय मूल्यों को शिक्षा व्यवस्था में प्राथमिकता दे रही है, जिससे कांग्रेस असहज दिखाई देती है।

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भाजयुमो जिला उपाध्यक्ष ने कहा कि बस्तर की जनता धार्मिक आस्था, सामाजिक समरसता और विकास की राजनीति में विश्वास रखती है। उन्होंने सभी नागरिकों से बाहुड़ा गोंचा महापर्व में बढ़-चढ़कर सहभागी बनने, प्रभु श्री जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त करने तथा समाज में सद्भाव और सकारात्मक वातावरण बनाए रखने की अपील की।

उन्होंने कहा कि बस्तर की पहचान उसकी संस्कृति, परंपरा और आपसी भाईचारे से है। ऐसे अवसरों पर सभी राजनीतिक दलों को भी जनभावनाओं का सम्मान करते हुए सामाजिक एकता और सौहार्द को प्राथमिकता देनी चाहिए।

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