पुनर्वास से आत्मनिर्भरता की ओर: बीजापुर के पुनर्वासित युवाओं ने जाना बस्तर का इतिहास, संस्कृति और विकास

जगदलपुर, 20 जुलाई। बीजापुर जिले के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से लौटकर समाज की मुख्यधारा में शामिल हुए तथा वर्तमान में नुआ बाट पुनर्वास केंद्र में निवासरत पुनर्वासित युवाओं के लिए रविवार का दिन प्रेरणादायक और यादगार रहा। पुनर्वास केंद्र में पिछले ढाई महीनों से वेल्डिंग का व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे युवाओं को जिला प्रशासन की विशेष पहल पर बस्तर के प्रमुख धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों का शैक्षणिक एवं अध्ययन भ्रमण कराया गया।

इस पहल का उद्देश्य केवल पर्यटन कराना नहीं था, बल्कि युवाओं को बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक महत्व और विकास की नई तस्वीर से परिचित कराना भी था। भ्रमण के दौरान युवाओं ने बस्तर की परंपराओं, प्राकृतिक धरोहरों और आधुनिक विकास को करीब से देखा और समझा।

इस शैक्षणिक भ्रमण की रूपरेखा उस समय बनी थी, जब जिला पंचायत बस्तर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने नुआ बाट पुनर्वास केंद्र का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान हितग्राहियों ने उनसे संवाद करते हुए बस्तर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों को देखने की इच्छा व्यक्त की थी। युवाओं की इस सकारात्मक सोच और जिज्ञासा को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर के मार्गदर्शन में जिला परियोजना लाइवलीहुड कॉलेज बस्तर द्वारा इस भ्रमण का आयोजन किया गया।

दिनभर चले भ्रमण के दौरान पुनर्वासित युवाओं ने सर्वप्रथम माँ दंतेश्वरी मंदिर पहुंचकर दर्शन एवं पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने बस्तर राजमहल का भ्रमण कर रियासतकालीन इतिहास और सांस्कृतिक विरासत की जानकारी प्राप्त की। दलपत सागर की प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक महत्व को भी उन्होंने करीब से देखा। इसके पश्चात युवाओं ने विश्व प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात का भ्रमण किया, जिसे भारत का नियाग्रा भी कहा जाता है। यात्रा के अंतिम चरण में उन्होंने माँ दंतेश्वरी एयरपोर्ट का दौरा कर बस्तर में बढ़ती आधुनिक सुविधाओं और क्षेत्र की बेहतर होती कनेक्टिविटी को भी समझा।

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पुनर्वास केंद्र में प्राप्त व्यावसायिक प्रशिक्षण और इस तरह के व्यावहारिक अनुभवों ने युवाओं में आत्मविश्वास का संचार किया है। प्रशासन का मानना है कि कौशल विकास, अनुशासन और सकारात्मक वातावरण के माध्यम से ये युवा आत्मनिर्भर बनकर समाज में सम्मानजनक जीवन जीने के साथ-साथ अन्य भटके हुए युवाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेंगे।

जिला प्रशासन की यह पहल इस बात का उदाहरण है कि पुनर्वास केवल मुख्यधारा में वापसी तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं को नई सोच, नए अवसर और आत्मनिर्भर भविष्य की ओर अग्रसर करने का एक सशक्त माध्यम भी है।

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