काचनगादी से बाहार रैनी तक निभाई सहभागिता, महाराजा कमलचंद भंजदेव के साथ कुम्हड़ाकोट में नयाखानी की परंपरा में भी हुए शामिल
जगदलपुर। विश्वप्रसिद्ध 75 दिवसीय बस्तर दशहरा में भोपालपट्टनम ज़मींदारी परिवार की सक्रिय सहभागिता देखने को मिली। परिवार के भाग्यांश आदिनारायण राज पामभोई अपने भाइयों क्षितिज पामभोई, मानस पामभोई एवं साहित्य राज पामभोई के साथ दशहरा पर्व के विभिन्न पारंपरिक आयोजनों में शामिल हुए। काचनगादी से लेकर बाहार रैनी तक उनकी उपस्थिति बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक परंपराओं के प्रति जुड़ाव को दर्शाती रही।

महाराजा कमलचंद भंजदेव के साथ निभाई नयाखानी की परंपरा
बस्तर राजपरिवार के महाराजा कमलचंद भंजदेव के साथ भाग्यांश आदिनारायण राज पामभोई एवं उनके भाइयों ने कुम्हड़ाकोट में आयोजित नयाखानी की पारंपरिक रस्म में सहभागिता निभाई। इसके साथ ही परिवार के सदस्य रथ से जुड़ी विभिन्न पारंपरिक रस्मों और दशहरा के अन्य आयोजनों में भी उपस्थित रहे।
बस्तर दशहरा अपनी विशिष्ट परंपराओं, जनजातीय आस्था और सामूहिक सहभागिता के लिए देश-दुनिया में विशेष पहचान रखता है। यह पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि बस्तर की ऐतिहासिक पहचान, सामाजिक एकजुटता और पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है।
सांस्कृतिक विरासत से जुड़ाव का संदेश
बस्तर दशहरा के विभिन्न आयोजनों में भोपालपट्टनम ज़मींदारी परिवार की सहभागिता बस्तर और भोपालपट्टनम के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित करती है। पारंपरिक रस्मों में परिवार के सदस्यों की उपस्थिति इस बात को भी सामने लाती है कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और उसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में सामाजिक सहभागिता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

भाग्यांश आदिनारायण राज पामभोई का अपने भाइयों के साथ इन आयोजनों में शामिल होना पारिवारिक परंपराओं के प्रति जुड़ाव और बस्तर की सांस्कृतिक पहचान के प्रति सम्मान का परिचायक रहा। बस्तर दशहरा जैसे ऐतिहासिक महापर्व विभिन्न क्षेत्रों और परिवारों को एक साझा सांस्कृतिक सूत्र में जोड़ते हैं।






