बस्तर दशहरा की परंपराओं पर विवाद, राष्ट्रपति के सामने प्रतीकात्मक काछन देवी की प्रस्तुति से पनका समाज नाराज

काछन देवी की पारंपरिक रस्म को लेकर उठे सवाल, समाज ने जताई आपत्ति; आयोजकों की भूमिका पर भी चर्चा

जगदलपुर। विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा अपनी अनूठी जनजातीय परंपराओं, धार्मिक आस्थाओं और सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। लेकिन इस वर्ष राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के बस्तर प्रवास के दौरान हुई एक प्रस्तुति को लेकर नया विवाद सामने आया है। लालबाग मैदान में राष्ट्रपति के समक्ष काछन देवी के प्रतीकात्मक स्वरूप की प्रस्तुति किए जाने पर पनका समाज के लोगों ने नाराजगी जताई है। समाज के कुछ लोगों का आरोप है कि इस प्रस्तुति से बस्तर दशहरा की मूल परंपरा और काछन देवी से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं की अनदेखी हुई है।

लालबाग की प्रस्तुति पर क्यों उठे सवाल?

राष्ट्रपति के ऐतिहासिक बस्तर प्रवास के दौरान लालबाग मैदान में बस्तर दशहरा की प्रमुख रस्मों और सांस्कृतिक परंपराओं को प्रदर्शित करने के लिए विशेष झांकी तैयार की गई थी। इसका उद्देश्य देश की प्रथम नागरिक को बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना था।

इसी प्रस्तुति के दौरान एक नाबालिग बच्ची को काछन देवी के प्रतीकात्मक स्वरूप में प्रस्तुत किए जाने की बात सामने आई। इसके बाद पनका समाज के लोगों ने इस पर आपत्ति जताई। उनका कहना है कि काछन देवी केवल किसी झांकी या मंचीय प्रस्तुति का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि बस्तर दशहरा की गहरी आस्था और पारंपरिक अनुष्ठान से जुड़ी हुई हैं।

समाज के लोगों की आपत्ति इस बात को लेकर है कि राष्ट्रपति के सामने वास्तविक धार्मिक परंपरा से जुड़े प्रतिनिधियों के स्थान पर प्रतीकात्मक प्रस्तुति क्यों की गई। इसे लेकर कार्यक्रम की रूपरेखा और संबंधित निर्णयों पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

इसे भी पढ़िए -   बदलते बस्तर की नई पहचान लेकर दिल्ली रवाना हुआ 164 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से करेगा मुलाकात

हालांकि, इस मामले में प्रशासन और आयोजन से जुड़े पक्षों का आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आना महत्वपूर्ण होगा, ताकि प्रस्तुति के पीछे की परिस्थितियों और निर्णय की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सके।

बस्तर दशहरा में काछन देवी का विशेष स्थान

बस्तर दशहरा की पहचान केवल रथ परिक्रमा और मुरिया दरबार तक सीमित नहीं है। इसकी प्रत्येक रस्म के पीछे ऐतिहासिक मान्यताएं, जनजातीय आस्था और सामाजिक परंपराएं जुड़ी हुई हैं। इन्हीं महत्वपूर्ण परंपराओं में काछन गादी का विशेष स्थान है।

परंपरा के अनुसार, काछन गादी की रस्म में बेल के कांटों से बने झूले पर एक नाबालिग बालिका को विराजमान किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस अनुष्ठान के माध्यम से काछन देवी से दशहरा पर्व के निर्विघ्न आयोजन की अनुमति और आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है।

यह रस्म बस्तर की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और स्थानीय समुदायों की आस्था का प्रतीक है। इसलिए इससे जुड़े किसी भी आयोजन या प्रस्तुति को लेकर स्थानीय समाज विशेष संवेदनशीलता रखता है।

परंपरा और प्रतीकात्मक प्रस्तुति के बीच उठी बहस

इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बस्तर की पारंपरिक धार्मिक रस्मों को राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों में प्रस्तुत करते समय उनकी मूल भावना और प्रामाणिकता का ध्यान किस तरह रखा जाना चाहिए।

पनका समाज के लोगों ने नाराजगी जताते हुए मामले में औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की बात कही है। समाज की आपत्ति का केंद्र यह है कि बस्तर की धार्मिक परंपराओं को केवल सांस्कृतिक प्रदर्शन तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए।

दूसरी ओर, यदि राष्ट्रपति के कार्यक्रम में सुरक्षा, समय या प्रोटोकॉल से जुड़ी कोई बाध्यता रही हो, तो उसकी जानकारी भी सामने आनी चाहिए। इससे पूरे घटनाक्रम को समझने और उठ रहे सवालों का तथ्यात्मक जवाब मिलने में मदद मिलेगी।

इसे भी पढ़िए -   थर्मल ड्रोन से लैस हुआ बस्तर वन मंडल, अब रात के अंधेरे में भी होगी जंगलों की हाई-टेक निगरानी

आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक गरिमा का सवाल

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का बस्तर आगमन क्षेत्र के लिए गौरवपूर्ण अवसर रहा। ऐसे ऐतिहासिक दौरे के दौरान बस्तर की विशिष्ट परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर भी मिला। लेकिन काछन देवी की प्रस्तुति को लेकर उठे सवाल अब आयोजन की व्यवस्था से आगे बढ़कर सांस्कृतिक प्रामाणिकता और स्थानीय समुदायों की भावनाओं से जुड़ गए हैं।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पनका समाज की आपत्ति पर संबंधित पक्ष क्या स्पष्टीकरण देते हैं और क्या इस मामले में कोई औपचारिक पहल की जाती है।

बस्तर दशहरा की वास्तविक पहचान उसकी जीवंत परंपराओं, जनजातीय आस्था और सामुदायिक सहभागिता में है। ऐसे में आवश्यक है कि इस विरासत को प्रदर्शित करते समय परंपरा की मूल भावना और उससे जुड़े समाजों के सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

Latest News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *