पीढ़ियां बदलीं, पर नहीं बदली रथ बनाने की परंपरा; माई के शिल्पकारों के साथ खड़े हुए कुमार जयदेव

बुजुर्ग कारीगरों को ₹50 हजार की मदद, बकरे और रोजाना गर्म नाश्ते की भी व्यवस्था

जगदलपुर। बस्तर दशहरा का विजय रथ सिर्फ लकड़ी, रस्सी और कीलों से तैयार नहीं होता, बल्कि इसके पीछे पीढ़ियों से चली आ रही आस्था, परंपरा और निस्वार्थ सेवा की एक गहरी कहानी जुड़ी है। इसी परंपरा को जीवित रखने झाड़उमरगांव और बेड़ाउमरगांव से पहुंचे बुजुर्ग बढ़ई कारीगर इन दिनों दिन-रात रथ निर्माण में जुटे हुए हैं। 60 से 70 वर्ष की उम्र के इन कारीगरों के हाथों में हथौड़ी और सामने विशाल लकड़ियां हैं। इनकी मेहनत और सेवा को सम्मान देने सुकमा जमींदार परिवार के सदस्य कुमार जयदेव आगे आए।

रथ निर्माण स्थल पर कारीगरों से मुलाकात के दौरान कुमार जयदेव ने उनकी समस्याएं सुनीं। कारीगरों ने बताया कि बारिश और बाढ़ के कारण इस वर्ष वे करीब आठ दिन विलंब से पहुंचे हैं। प्रशासन की ओर से राशन-पानी की व्यवस्था मिल रही है, लेकिन महंगाई के दौर में रोजमर्रा की जरूरतों को लेकर कुछ परेशानी बनी हुई है।

कारीगरों की बात सुनने के बाद कुमार जयदेव ने तत्काल 50 हजार रुपए की सहयोग राशि देने की घोषणा की। इसके साथ ही बस्तर दशहरा की परंपरा के अनुसार बकरे की व्यवस्था करने और रथ निर्माण में जुटे कारीगरों के लिए हर सुबह गर्म नाश्ते की व्यवस्था कराने की बात कही।

‘आप मजदूर नहीं, मेरे परिवार हैं’

कारीगरों से संवाद के दौरान कुमार जयदेव ने कहा कि वे यहां मजदूरी करने नहीं, बल्कि माई दंतेश्वरी की सेवा करने आए हैं। उन्होंने कारीगरों से कहा कि वे खुद को अकेला न समझें। उनका सम्मान और सुविधा सुनिश्चित करना समाज की जिम्मेदारी है।

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उन्होंने कहा कि ये कारीगर अपने साथ घर से औजार और कई जरूरी संसाधन लेकर आते हैं। यहां तक कि रस्सी और रथ निर्माण में उपयोग होने वाली कई चीजें भी वे स्वयं तैयार करते हैं। ऐसे में उनकी सेवा को केवल मेहनत या मजदूरी के रूप में देखना बस्तर की परंपरा की भावना को छोटा करना होगा।

पीढ़ियों से निभा रहे रथ निर्माण की जिम्मेदारी

रथ निर्माण दल के मुखिया मोतीराम नाग, झाड़उमरगांव ने बताया कि झाड़उमरगांव और बेड़ाउमरगांव के ग्रामीण पीढ़ियों से बस्तर दशहरा के लिए रथ निर्माण करने जगदलपुर आते हैं। उनके दादा-परदादा भी इसी सेवा में जुटे रहे हैं और अब यह जिम्मेदारी उनकी पीढ़ी निभा रही है।

कारीगरों का कहना है कि वे किसी विशेष मांग को लेकर यहां नहीं आते। उनके लिए यह माई की सेवा और पूर्वजों से मिली जिम्मेदारी है। बदलते समय में जब व्यवस्थाओं और खर्चों की जरूरत बढ़ी है, तब समाज और जनप्रतिनिधियों की ओर से मिलने वाला सहयोग उनके लिए सम्मान के साथ-साथ मनोबल भी बढ़ाता है।

इस अवसर पर सिकन्दर ठाकुर, रथ निर्माण के प्रमुख दलपति, जगन्नाथ मंदिर के पुजारी शुभ्रांशु पाढ़ी, मावली मंदिर के पुजारी अनिल ठाकुर, माड़पाल के पुजारी भानुप्रताप, माड़पाल के ही पुजारी गुप्तेश ठाकुर, योगेश ठाकुर, पीताम्बर ठाकुर, मुरली सिंह, देवेंद्र राठौर, प्रकाश रावल, विक्रम ठाकुर, मनोज जंगम, विवेक जैन, निखिल दास, धीरज मेहरा सहित अन्य रथ निर्माण कार्य में लगे कारीगर उपस्थित रहे।

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