भोला कश्यप प्रकरण ने बस्तर की स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी पर उठाए गंभीर सवाल : नवनीत चाँद

टीबी के इलाज के बाद 28 वर्षीय आदिवासी मजदूर की ब्रेन सर्जरी पर उठे सवाल, कोंटिनेंटल अस्पताल के PPP अनुबंध और NMDC की वित्तीय सहायता की स्वतंत्र ऑडिट की मांग

जगदलपुर। करकापाल के बड़ेपारा निवासी 28 वर्षीय आदिवासी मजदूर भोला कश्यप के उपचार को लेकर बस्तर में स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी पर सवाल उठने लगे हैं। परिजनों के अनुसार टीबी के उपचार के बाद उसके ब्रेन में पानी भरने की जानकारी देकर डिमरापाल स्थित कोंटिनेंटल अस्पताल में 9 अगस्त को ब्रेन ऑपरेशन किया गया। परिजनों का कहना है कि ऑपरेशन के बाद भोला को होश नहीं आया और गंभीर स्थिति को देखते हुए 13 अगस्त की रात उसे विशाखापट्टनम ले जाया गया, जहां उसका उपचार जारी है।

बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के बस्तर संभाग अध्यक्ष नवनीत चाँद ने कहा कि परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों को जांच से पहले सही या गलत नहीं माना जा सकता, लेकिन एक गरीब आदिवासी मरीज के उपचार में सामने आए इस गंभीर घटनाक्रम की निष्पक्ष मेडिकल जांच आवश्यक है।

सरकार से सीधे सवालनवनीत चाँद ने सवाल

उठाते हुए कहा कि टीबी के उपचार से ब्रेन सर्जरी तक पहुंचने का चिकित्सकीय आधार क्या था? ऑपरेशन से पहले MRI, CT स्कैन एवं अन्य आवश्यक जांचों की स्वतंत्र न्यूरोसर्जिकल समीक्षा हुई थी या नहीं? ऑपरेशन किस विशेषज्ञ द्वारा किया गया? क्या मरीज के परिजनों से वैध Informed Consent लिया गया था?

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि ऑपरेशन के दौरान एनेस्थीसिया, ICU एवं क्रिटिकल केयर की आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध थीं या नहीं तथा मरीज के संपूर्ण मेडिकल रिकॉर्ड में उपचार के प्रत्येक चरण को विधिवत दर्ज किया गया है या नहीं।

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साथ ही स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन और संबंधित जनप्रतिनिधियों से अस्पताल की विशेषज्ञ सेवाओं, मानव संसाधन, मरीजों की शिकायतों तथा PPP अनुबंध की शर्तों के अनुपालन की नियमित निगरानी को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है।

एक मरीज नहीं, पूरी व्यवस्था की स्वतंत्र जांच की मांगबस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) ने मांग की है कि—भोला कश्यप प्रकरण की स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड से जांच कराई जाए, जिसमें न्यूरोसर्जन, न्यूरोलॉजिस्ट, एनेस्थीसिया एवं संबंधित विशेषज्ञ शामिल हों।

MRI/CT रिपोर्ट, मेडिकल रिकॉर्ड, ऑपरेशन नोट, एनेस्थीसिया चार्ट, दवा रिकॉर्ड एवं Informed Consent सहित सभी दस्तावेज तत्काल सुरक्षित कर स्वतंत्र समीक्षा कराई जाए।

कोंटिनेंटल अस्पताल और राज्य सरकार के बीच हुए PPP अनुबंध की Point-wise Compliance एवं Third Party Performance Audit कराई जाए।

विशेषज्ञ डॉक्टरों के इस्तीफे, कर्मचारियों एवं मरीजों की पूर्व शिकायतों तथा विभागीय निरीक्षणों की भी जांच हो।

यदि NMDC द्वारा अस्पताल को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई है तो उसकी राशि, उपयोग, स्वीकृति, शर्तों एवं अपेक्षित स्वास्थ्य परिणामों का स्वतंत्र Financial Audit कराया जाए।

यदि उपचार आयुष्मान या किसी अन्य सरकारी योजना के तहत हुआ है तो संबंधित पैकेज, स्वीकृति, उपचार एवं भुगतान की भी ऑडिट कराई जाए।

जांच में यदि चिकित्सकीय लापरवाही, नियामकीय उल्लंघन अथवा अनुबंधीय चूक प्रमाणित होती है तो संबंधित चिकित्सक, अस्पताल प्रबंधन अथवा जिम्मेदार सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

भोला कश्यप के आगे के उपचार एवं परिवार पर पड़े आर्थिक बोझ को देखते हुए सरकार तत्काल मानवीय एवं नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराए।

“मकसद अस्पताल को दोषी ठहराना नहीं, सच्चाई सामने लाना है”

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नवनीत चाँद ने कहा, “यह लड़ाई किसी अस्पताल को जांच से पहले दोषी ठहराने की नहीं, बल्कि बस्तर के मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था में जनता का विश्वास बचाने की है। यदि आरोप गलत हैं तो निष्पक्ष जांच अस्पताल को क्लीन चिट देगी और यदि आरोप सही हैं तो जिम्मेदारी तय होगी। ईसलिए सरकार को जांच से पीछे नहीं हटना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा लंबे समय से क्षेत्र में सुलभ, गुणवत्तापूर्ण और जवाबदेह स्वास्थ्य व्यवस्था की मांग उठाता रहा है। अब सरकार को तय करना है कि भोला कश्यप के मामले में केवल आश्वासन दिया जाएगा या निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र जांच भी कराई जाएगी।

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