हौसले की उड़ान: हाथों से दिव्यांग राखी ने पैरों से लिखी सफलता की कहानी, 10वीं में 73.6% अंक हासिल

जगदलपुर, 04 अगस्त 2026। कहते हैं कि अगर मन में कुछ कर दिखाने का जज्बा हो, तो शारीरिक चुनौतियां कभी सफलता की राह में रोड़ा नहीं बन सकतीं। इस बात को सच कर दिखाया है बस्तर जिले के छोटे से गांव बेंगलूर की रहने वाली कुमारी राखी नाग ने। जन्म से ही लोकोमोटर दिव्यांगता से जूझ रहीं राखी अपने दोनों हाथों का इस्तेमाल नहीं कर पाती हैं, लेकिन उन्होंने अपने अटूट साहस और दृढ़ संकल्प के बल पर छत्तीसगढ़ 10वीं बोर्ड परीक्षा में 73.6 प्रतिशत अंक (प्रथम श्रेणी) प्राप्त कर एक मिसाल कायम की है।

स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, नानगुर (जिला बस्तर) में अध्ययनरत राखी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे अपने दाहिने पैर से लिखकर अपनी पढ़ाई करती हैं। उनके पिता धनसिंह नाग, जो एक गैस एजेंसी में मजदूरी का काम करते हैं, और माता चैती नाग ने गरीबी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद राखी के सपनों को कभी टूटने नहीं दिया। परिवार के निरंतर सहयोग और प्रेरणा से ही राखी का आत्मविश्वास हर कदम पर बढ़ता गया।

राखी की इस लगन को पंख तब मिले, जब विद्यालय निरीक्षण के दौरान खंड शिक्षा अधिकारी श्री अनिल दास को उनकी विशेष परिस्थिति की जानकारी मिली। इसके बाद माध्यमिक शिक्षा मंडल के नियमानुसार उन्हें बोर्ड परीक्षा में राइटर (लेखन सहायक) की सुविधा प्रदान की गई। कक्षा नवमी की छात्रा नव्या निर्मलकर ने परीक्षा के दौरान पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ राखी के लिए राइटर की भूमिका निभाई, जिससे राखी बिना किसी रुकावट के अपनी परीक्षा दे सकीं। इसके साथ ही सेजेस नानगुर के प्राचार्य श्री विनोद सिंह भदौरिया एवं अन्य शिक्षकों ने भी समय-समय पर मार्गदर्शन देकर राखी का हौसला बढ़ाया।

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बस्तर सांसद ने भेंट की इलेक्ट्रॉनिक व्हीलचेयर

राखी की इस अभूतपूर्व सफलता और संघर्ष की कहानी जब सामने आई, तो बस्तर सांसद श्री महेश कश्यप स्वयं ग्राम बेंगलूर स्थित राखी के घर पहुंचे। उन्होंने राखी के जज्बे की भूरि-भूरि प्रशंसा की और उनकी पढ़ाई व आवाजाही को सुगम बनाने के लिए उन्हें एक इलेक्ट्रॉनिक व्हीलचेयर भेंट की।

राखी नाग की यह सफलता उन सभी विद्यार्थियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है, जो विपरीत परिस्थितियों के आगे घुटने टेक देते हैं। उन्होंने अपनी लगन से यह साबित कर दिखाया है कि यदि संवेदनशीलता, सही मार्गदर्शन और अटूट इच्छाशक्ति का साथ हो, तो पैरों से भी सफलता की एक नई और अमर कहानी लिखी जा सकती है।

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