30 जुलाई तक SIT गठित करें, नहीं तो बस्तर से दिल्ली तक उठेगी आवाज : नवनीत चाँद

बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा ने संभाग आयुक्त कार्यालय में सौंपा ज्ञापन; 10 वर्षों के खनिज रिकॉर्ड के फोरेंसिक ऑडिट, CBI/ED जांच और अवैध लौह अयस्क तस्करी पर समयबद्ध कार्रवाई की मांग

जगदलपुर। बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा के मुख्य संयोजक एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के बस्तर संभाग अध्यक्ष नवनीत चाँद के नेतृत्व तथा बस्तर जिला ग्रामीण अध्यक्ष संतु राम कश्यप की अध्यक्षता में संगठन के जिला पदाधिकारियों ने बस्तर संभाग आयुक्त की अनुपस्थिति में सहायक आयुक्त, बस्तर संभाग के माध्यम से मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव तथा खनिज, वन, राजस्व, गृह, परिवहन एवं अन्य संबंधित विभागों के नाम विस्तृत ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में बस्तर संभाग में कथित अवैध लौह अयस्क उत्खनन, भंडारण, परिवहन, वन कटाई एवं संभावित राजस्व हानि के पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय एसआईटी जांच, फोरेंसिक ऑडिट तथा आवश्यकता पड़ने पर सीबीआई और ईडी से जांच कराने की मांग की गई है।ज्ञापन में कहा गया है कि बैलाडीला, बचेली, किरंदुल, पेंडवार, मिरतुर, गंगालूर, धुरली, नारायणपुर, ओरछा और अंतागढ़ सहित विभिन्न क्षेत्रों से अवैध खनिज गतिविधियों एवं वन क्षेत्रों में अनियमितताओं से संबंधित समाचार लगातार सामने आ रहे हैं।

ऐसे में केवल अलग-अलग घटनाओं पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि पूरे तंत्र की वैज्ञानिक, तकनीकी और निष्पक्ष जांच आवश्यक है।संगठन ने मांग की है कि पिछले 10 वर्षों के उत्पादन, डिस्पैच, स्टॉक, रॉयल्टी, ट्रांजिट पास, रेलवे रैक, वे-ब्रिज एवं परिवहन रिकॉर्ड का फोरेंसिक ऑडिट कराया जाए। साथ ही वन, खनिज, राजस्व, पुलिस, परिवहन, रेलवे एवं अन्य संबंधित विभागों की भूमिका की स्वतंत्र जांच कर जवाबदेही तय की जाए।

यदि जांच में आर्थिक अनियमितता, राजस्व हानि या अन्य वैधानिक उल्लंघन के तथ्य सामने आते हैं, तो सक्षम कानूनों के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।नवनीत चाँद ने कहा कि उनकी मांग किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि तथ्य, साक्ष्य और कानून आधारित निष्पक्ष जांच की है। उन्होंने कहा कि बस्तर की खनिज संपदा बस्तर की जनता की धरोहर है और इसकी सुरक्षा राज्य का संवैधानिक दायित्व है।

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उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 30 जुलाई तक बस्तर संभाग के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर प्रभावी कार्रवाई प्रारंभ नहीं की जाती तथा व्यापक जांच नहीं कराई जाती, तो बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा का प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल, सीबीआई, ईडी तथा भारत सरकार के संबंधित केंद्रीय मंत्रियों के समक्ष पूरे मामले को प्रस्तुत करेगा और संविधान एवं कानून के दायरे में लोकतांत्रिक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।

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