गर्मी में बूंद-बूंद पानी को तरसता है बस्तर, मानसून में अनियंत्रित पानी से बाढ़ की मार झेलते हैं लोग
महानदी जल विवाद की तर्ज पर इंद्रावती-जोरानाला मुद्दे पर भी दोनों राज्यों के बीच उच्चस्तरीय वार्ता की मांग
केंद्र, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में भाजपा सरकार होने से वर्षों पुरानी समस्या के ऐतिहासिक समाधान की जगी उम्मीद — संतोष बाफना
जगदलपुर, 09 अक्टूबर 2026। बस्तर की प्राणदायिनी और क्षेत्र की प्रमुख नदी इंद्रावती तथा उससे जुड़े जोरानाला जल विवाद के स्थायी एवं न्यायसंगत समाधान की मांग को लेकर जगदलपुर के पूर्व विधायक संतोष बाफना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय जल संसाधन मंत्री सी.आर. पाटिल और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र भेजकर इस गंभीर मुद्दे पर ध्यान आकर्षित कराया है।

पूर्व विधायक संतोष बाफना ने हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की पहल पर छत्तीसगढ़ और ओडिशा के मुख्यमंत्रियों के बीच महानदी जल विवाद के समाधान के लिए शुरू हुए उच्चस्तरीय संवाद की सराहना करते हुए इंद्रावती-जोरानाला विवाद को भी प्राथमिकता के आधार पर वार्ता की मेज पर लाने की आवश्यकता जताई है।
समझौता भी, संरचना भी, फिर भी बस्तर को पानी क्यों नहीं?
बाफना ने अपने पत्र में इंद्रावती-जोरानाला जल विवाद की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए कहा है कि वर्ष 1975 में मध्य प्रदेश और ओडिशा के बीच हुए द्विपक्षीय समझौते के तहत ओडिशा को ऊपरी इंद्रावती परियोजना की अनुमति मिली थी। इसके बाद वर्ष 1979 के प्रावधानों में पूरे वर्ष इंद्रावती से छत्तीसगढ़ की ओर कुल 45 टीएमसी पानी के प्रवाह का नियम निर्धारित किया गया, लेकिन अलग-अलग महीनों में कितना पानी छोड़ा जाएगा, यह स्पष्ट नहीं किया गया।
बाफना के अनुसार, इसी कमी के कारण ओडिशा मानसून के दौरान खातीगुड़ा बांध भर जाने पर अचानक अनियंत्रित मात्रा में पानी छोड़ देता है, जबकि गर्मी के मौसम में पानी रोक लिया जाता है। इसका सीधा असर बस्तर के जलस्तर, नदी के प्रवाह और आम जनजीवन पर पड़ता है।
2003 के अनुपूरक समझौते के बावजूद समस्या बरकरार
इस समस्या के समाधान के लिए 24 दिसंबर 2003 को हुए अनुपूरक समझौते में गैर-मानसून अवधि यानी नवंबर से जून के दौरान कुल 9 टीएमसी पानी में से छत्तीसगढ़ और ओडिशा को 4.5-4.5 टीएमसी पानी देने पर सहमति बनी थी। इसके लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा लगभग 49.37 करोड़ रुपये की लागत से जोरानाला के मुहाने पर कंट्रोल स्ट्रक्चर का निर्माण कराया गया था।
हालांकि, बाफना ने पत्र में आरोप लगाया है कि जोरानाला के मुहाने पर गाद और रेत जमा होने तथा वर्ष 2003 में निर्मित कंट्रोल स्ट्रक्चर में स्थानीय असामाजिक तत्वों द्वारा तोड़फोड़ किए जाने के कारण गैर-मानसून अवधि में बस्तर को उसके हिस्से का 4.5 टीएमसी पानी नहीं मिल पा रहा है।
इसका परिणाम यह है कि गर्मी के मौसम में इंद्रावती नदी का प्रवाह कमजोर पड़ने लगता है और विश्वप्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात के अस्तित्व पर भी संकट गहराने लगता है।
गर्मी में पानी का संकट, मानसून में भीषण बाढ़
पूर्व विधायक ने पत्र में बस्तर के सामने मौजूद दोहरी समस्या को प्रमुखता से उठाया है। एक ओर गर्मी के दिनों में इंद्रावती नदी में पानी की कमी से आम नागरिकों, किसानों और प्राकृतिक जलस्रोतों पर संकट गहराता है, वहीं दूसरी ओर वर्षा ऋतु में खातीगुड़ा बांध से अचानक अनियंत्रित पानी छोड़े जाने के कारण बस्तर को भीषण बाढ़ का सामना करना पड़ता है।
बाफना के अनुसार, हाल ही में आई ऐतिहासिक बाढ़ के कारण जगदलपुर शहर और इंद्रावती नदी के तटीय क्षेत्रों के सैकड़ों गांव जलमग्न हुए। हजारों एकड़ फसलें नष्ट हुईं और सैकड़ों परिवार बेघर होकर खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हुए।
उन्होंने कहा कि यदि जल प्रबंधन की व्यवस्था पारदर्शी और वैज्ञानिक हो तथा दोनों राज्यों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित किया जाए, तो गर्मी में पानी की कमी और मानसून में बाढ़ से होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है।
तीनों जगह भाजपा सरकार, समाधान की उम्मीद
संतोष बाफना ने कहा कि पूर्व में राज्यों में अलग-अलग राजनीतिक दलों की सरकारें होने के कारण अंतरराज्यीय समन्वय में कई बार कठिनाइयां आती थीं। लेकिन वर्तमान में केंद्र सरकार के साथ छत्तीसगढ़ और ओडिशा में भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार होने से आपसी संवाद और समन्वय के माध्यम से दशकों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान निकालने की बेहतर संभावना है
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया है कि जिस प्रकार महानदी जल विवाद के समाधान के लिए दोनों राज्यों के बीच उच्चस्तरीय संवाद की पहल की गई है, उसी प्रकार इंद्रावती-जोरानाला विवाद के समाधान के लिए भी दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की विशेष बैठक बुलाई जाए।
प्रधानमंत्री के सामने रखीं ये प्रमुख मांगें
पूर्व विधायक संतोष बाफना ने अपने मांग पत्र में निम्नलिखित कदम उठाने का आग्रह किया है
—उच्चस्तरीय बैठक: इंद्रावती-जोरानाला जल विवाद के स्थायी समाधान के लिए छत्तीसगढ़ और ओडिशा के मुख्यमंत्रियों के बीच विशेष बैठक आयोजित की जाए।
कंट्रोल स्ट्रक्चर का पुनर्निर्माण: जोरानाला पर क्षतिग्रस्त कंट्रोल स्ट्रक्चर का पुनर्निर्माण कर उसे मजबूत और प्रभावी बनाया जाए।
सुरक्षा और निगरानी: जल संरचना की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे, सुरक्षा बल और संयुक्त गेजिंग स्टेशन स्थापित किए जाएं, ताकि पानी के प्रवाह की नियमित निगरानी हो सके।
प्रधानमंत्री के सामने रखीं ये प्रमुख मांगें
पूर्व विधायक संतोष बाफना ने अपने मांग पत्र में निम्नलिखित कदम उठाने का आग्रह किया है—उच्चस्तरीय बैठक: इंद्रावती-जोरानाला जल विवाद के स्थायी समाधान के लिए छत्तीसगढ़ और ओडिशा के मुख्यमंत्रियों के बीच विशेष बैठक आयोजित की जाए।
कंट्रोल स्ट्रक्चर का पुनर्निर्माण: जोरानाला पर क्षतिग्रस्त कंट्रोल स्ट्रक्चर का पुनर्निर्माण कर उसे मजबूत और प्रभावी बनाया जाए।
सुरक्षा और निगरानी: जल संरचना की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे, सुरक्षा बल और संयुक्त गेजिंग स्टेशन स्थापित किए जाएं, ताकि पानी के प्रवाह की नियमित निगरानी हो सके।
बस्तर के हित में स्थायी समाधान की जरूरत
संतोष बाफना ने जोर देते हुए कहा कि इंद्रावती केवल एक नदी नहीं, बल्कि बस्तर की जीवनरेखा है। इसके जल प्रवाह का सीधा संबंध क्षेत्र की पेयजल व्यवस्था, कृषि, पर्यावरण और पर्यटन से है। इसलिए जोरानाला विवाद का समाधान केवल दो राज्यों के बीच जल बंटवारे का विषय नहीं, बल्कि बस्तर के भविष्य और जनहित से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हस्तक्षेप और दोनों राज्यों के बीच बेहतर समन्वय से इस लंबे समय से लंबित विवाद का स्थायी एवं न्यायसंगत समाधान निकलेगा, जिससे बस्तर को गर्मी में पर्याप्त पानी मिल सके और मानसून के दौरान अनियंत्रित जल प्रवाह से होने वाली तबाही पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके।
आशीष श्रीवास्तव
Founder & Editor-in-Chief
BMN – BASTAR MATI NEWS






