बस्तर दशहरा की सभी रस्मों में बस्तर सांस्कृतिक सुरक्षा मंच के 350 स्वयंसेवकों ने निभाई अहम भूमिका

माँ मावली की डोली और माँ दंतेश्वरी के छत्र की विदाई तक मुस्तैद रहे स्वयंसेवक, भावुक क्षणों में साष्टांग प्रणाम कर जताई श्रद्धा

जगदलपुर। विश्वप्रसिद्ध 75 दिवसीय बस्तर दशहरा पर्व की विभिन्न रस्मों एवं धार्मिक आयोजनों में बस्तर सांस्कृतिक सुरक्षा मंच के लगभग 350 स्वयंसेवकों ने सक्रिय सहभागिता निभाते हुए महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। पर्व की शुरुआत से लेकर माँ मावली की डोली एवं माँ दंतेश्वरी के छत्र की विदाई तक स्वयंसेवक पूरी निष्ठा, अनुशासन और समर्पण के साथ व्यवस्थाओं में जुटे रहे।

बस्तर दशहरा बस्तर की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और सदियों पुरानी परंपराओं का प्रतीक है। इस ऐतिहासिक पर्व में शामिल होने के लिए दूर-दराज के गांवों से बड़ी संख्या में देवी-देवता, उनके सेवक और श्रद्धालु जगदलपुर पहुंचते हैं। ऐसे में विभिन्न धार्मिक रस्मों के दौरान व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखना महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। बस्तर सांस्कृतिक सुरक्षा मंच के स्वयंसेवकों ने इस जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए आयोजन में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।

देवी-देवताओं और उनके सेवकों की व्यवस्था में निभाई जिम्मेदारी

बस्तर दशहरा की विभिन्न रस्मों एवं धार्मिक आयोजनों के दौरान मंच के स्वयंसेवकों ने दूर-दराज के गांवों से पहुंचे देवी-देवताओं एवं उनके सेवकों को व्यवस्थित रूप से निर्धारित स्थानों तक पहुंचाने में सहयोग किया। इसके साथ ही श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने और धार्मिक रस्मों के सुचारु संचालन में भी सक्रिय भूमिका निभाई।

स्वयंसेवकों ने पूरी श्रद्धा, अनुशासन और सेवाभाव के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। पर्व के दौरान विभिन्न आयोजनों में उनकी सक्रिय उपस्थिति से व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में सहयोग मिला। शुरुआत से लेकर समापन की प्रमुख रस्मों तक स्वयंसेवक पूरी मुस्तैदी के साथ अपनी सेवाएं देते रहे।

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माँ मावली और माँ दंतेश्वरी की विदाई पर भावुक हुए स्वयंसेवक

75 दिवसीय बस्तर दशहरा पर्व के समापन अवसर पर माँ मावली की डोली और माँ दंतेश्वरी के छत्र की विदाई के दौरान भावुक दृश्य देखने को मिले। आराध्य देवियों की विदाई के समय बस्तर सांस्कृतिक सुरक्षा मंच के स्वयंसेवकों ने साष्टांग प्रणाम कर अपनी गहरी श्रद्धा और आस्था प्रकट की।

देवी-देवताओं के प्रति बस्तरवासियों की अटूट आस्था और पारंपरिक रीति-रिवाजों के प्रति समर्पण इस अवसर पर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। स्वयंसेवकों के लिए यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि बस्तर की सांस्कृतिक विरासत और आस्था से जुड़ा भावनात्मक क्षण भी रहा।

बस्तर की संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता

बस्तर सांस्कृतिक सुरक्षा मंच के लगभग 350 स्वयंसेवकों की सहभागिता ने बस्तर दशहरा की विभिन्न रस्मों में सेवा, अनुशासन और समर्पण की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। देवी-देवताओं की परंपराओं, धार्मिक आयोजनों और श्रद्धालुओं की व्यवस्था में योगदान देकर स्वयंसेवकों ने बस्तर की अनूठी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित की।

विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि बस्तर की ऐतिहासिक परंपराओं, लोक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। ऐसे आयोजन में स्वयंसेवकों की सक्रिय सहभागिता पर्व की गरिमा बनाए रखने और आने वाली पीढ़ियों तक बस्तर की समृद्ध परंपराओं को पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जाती है।

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